Siddhant Chaturvedi: क्रिएटिविटी एक्स कल्चर का जश्न मनाने वाले आईएफपी का पंद्रहवां सीजन 29 नवंबर को मुंबई के महबूब स्टूडियो में शुरू हुआ। पहले दिन के सबसे फेमस मेहमानों में एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी पहुंचे थे, जिन्होंने वैभव मुंजाल के साथ बातचीत की।
Siddhant Chaturvedi: क्रिएटिविटी एक्स कल्चर का जश्न मनाने वाले आईएफपी का पंद्रहवां सीजन 29 नवंबर को मुंबई के महबूब स्टूडियो में शुरू हुआ। पहले दिन के सबसे फेमस मेहमानों में एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी पहुंचे थे, जिन्होंने वैभव मुंजाल के साथ बातचीत की।
उन्होंने फिल्म निर्माण के सिपिरिचुएल ट्रुथ, अपनी एक्टिंग मैथड, हिंदी सिनेमा में आइडेंटटी क्राइसिस और इंडिया को हिंदी फिल्मों की कहानियों की जरूरत को लेकर बात की है। उन्होंने फैंस को हंसने पर मजबूर कर दिया और अगले ही पल सोचने को मजबूर कर दिया - खासकर जब उन्होंने लेखकों, जेन-जी फैंस और एक एयरपोर्ट मिक्सअप की बात की।
सिद्धांत ने कहा कि मुंबई के फ़िल्मी दायरे से बाहर के कहानीकारों के लिए पहुंच का अभाव है। उन्होंने साफ़-साफ़ कहा, "लेखकों को उतनी पहुंच नहीं मिल रही, जितनी हमें चाहिए। हमें दूसरे और तीसरे दर्जे की कहानियां चाहिए। सिर्फ़ बड़ी-बड़ी कहानियां ही नहीं, बल्कि हमें लापता लेडीज़ जैसी ढेरों कहानियां चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इंडस्ट्री का भूगोल ही एक ही तरह काम करता है। अच्छे और आउटसाइडर लेखकों को पहुंच नहीं मिल पा रही है, क्योंकि पूरी इंडस्ट्री मुंबई पर बेस्ड है। मुंहई में भी, यह जुहू, बांद्रा या ज़्यादा से ज़्यादा अंधेरी है। इसलिए अगर भोपाल, ग्वालियर, बलिया या बनारस से कोई लेखक यहां आता है, तो मुझे नहीं लगता कि उसे पहुंच मिलेगी। क्योंकि शायद उसे अंग्रेज़ी नहीं आती होगी।
सिद्धांत ने ज़ोर देते हुए कहा कि मुख्यधारा का हिंदी सिनेमा आज दर्शकों से जुड़ने में क्यों परेशानी महसूस कर रहा है। उन्होंने एक अक्सर नज़रअंदाज़ की जाने वाले कल्चर की ओर इशारा करते हुए कहा कि, "आजकल, हिंदी एक्टर और एक्ट्रेसेस, जब भी हिंदी में इंटरव्यू देते हैं—अगर आप कोई भी इंटरव्यू देखें—तो उसकी शुरुआत हिंदी में होती है। हिंदी में दो पंक्तियां कहने के बाद, उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे कब अनजाने में अंग्रेज़ी बोलने लगते हैं। इसलिए फैंस उनसे जुड़ नहीं पा रहे हैं।
हमारे यंग दर्शक, जेन-ज़ी, पहले से ही नेटफ्लिक्स, कोरियाई सिनेमा और हॉलीवुड तक पहुंच रखते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे "लापता लेडीज़" जैसी किसी चीज़ की भी सराहना करेंगे, जो उन्हें कल्चर से मिलवाती है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जेन-ज़ी सबसे बुद्धिमान है। वे सच को उजागर कर सकते हैं। वे जानते हैं कि कोई कहानी सही जुनून या सच्चाई से बन रही है या नहीं। हमारे सिनेमा को अपनी चमक वापस पाने की ज़रूरत है। हमें बस भारत के दिल तक और करीब से पहुंच बनाने की ज़रूरत है।
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