Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'विमल इलायची' के विज्ञापन के लिए जारी किए गए 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) के बारे में बात की। कमिश्नर ने इन एक्टर्स को "कानून तोड़ने वाला" बताया और कहा कि FDA ने उस एक एक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसने नोटिस का जवाब नहीं दिया है।
'मैं उन्हें कानून तोड़ने वालों के तौर पर देखता हूं'
NDTV से बात करते हुए मुंडे ने कहा, "आपके लिए वे स्टार हो सकते हैं, लेकिन मेरे लिए इस मामले में वे सिर्फ विज्ञापन करने वाले हैं। इसलिए मैं उन्हें कानून तोड़ने वालों के तौर पर देख रहा हूं और कानून अपना काम करेगा। इसीलिए हमने कार्रवाई शुरू की है। हमने यह कार्रवाई कानून के मुताबिक की है।"
मुंडे ने पुष्टि करते हुए कहा कि तीनों एक्टर्स में से एक ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। अब FDA ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या शाहरुख खान ने नोटिस का जवाब दिया है तो उन्होंने कहा, "मुझे ठीक से याद नहीं है... क्योंकि यह मामला असिस्टेंट कमिश्नर के पास है। ज्यादातर संभावना है कि उन्होंने जवाब नहीं दिया है, लेकिन मुझे पक्का नहीं पता।" हालांकि कमिश्नर ने कहा कि जिन दो एक्टर्स ने जवाब दिया है, उनके जवाबों पर विचार किया जाएगा।
मुंडे इस तर्क से भी सहमत नहीं थे कि जिम्मेदारी बनाने वाली कंपनी की होती है न कि विज्ञापन करने वाले की। उन्होंने फ़ूड सेफ्टी एक्ट के तहत विज्ञापन से जुड़े नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रोडक्ट का विज्ञापन करने वाले व्यक्ति या संस्था की भी खास जिम्मेदारी होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञापन करने वालों की यह जिम्मेदारी है कि वे जिस चीज का विज्ञापन कर रहे हैं, उसके बारे में ठीक से जांच-पड़ताल करें। उन्होंने कहा कि यह कहना कि जिम्मेदारी उनकी नहीं है, न सिर्फ नैतिक रूप से बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है।
शाहरुख, अजय और टाइगर को FDA के नोटिस के बारे में
जानकारी के लिए बता दें कि FDA ने 11 अगस्त को नोटिस जारी किए थे। इनमें आरोप लगाया गया था कि शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ वाले 'विमल इलायची' के विज्ञापन असल में 'विमल पान मसाला' का सरोगेट प्रमोशन (अप्रत्यक्ष प्रचार) थे, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पाद है। इन एक्टर्स को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।
नोटिस में FSS एक्ट की धारा 24 का हवाला दिया गया, जो भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाती है, और धारा 53 का भी जिक्र किया गया, जिसके तहत खाने-पीने की चीजों का भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने या उसमें शामिल होने वाले व्यक्ति पर ₹10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।