Cinema Ka Flashaback: जब ‘चंबल की कसम’ की शूटिंग में मौसमी चटर्जी ने राजकुमार को सुनाई खरी-खोटी, पूरे यूनिट के होश उड़ गए

Cinema Ka Flashaback: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राजकुमार अपनी अलग अंदाज़ और डायलॉग डिलीवरी के लिए मशहूर थे। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें ‘जानी’ कहकर याद करते हैं। लेकिन 1980 में रिलीज़ हुई फिल्म चंबल की कसम की शूटिंग के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसने पूरे यूनिट को हैरान कर दिया। इस घटना में अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने राजकुमार को सबके सामने कड़ी फटकार लगाई।

अपडेटेड Feb 22, 2026 पर 3:16 PM
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बॉलीवुड के सुनहरे दौर की फिल्मों के सेट पर अक्सर मजेदार और चौंकाने वाले किस्से होते थे, जहां सितारे अपनी बेबाकी से सबको हैरान कर देते। 1980 में रिलीज हुई 'चंबल की कसम' का एक ऐसा ही वाकया आज भी फैन्स के बीच चर्चा का विषय है। इस एक्शन ड्रामा में राजकुमार ने डाकू ठाकुर सूरज सिंह का किरदार निभाया था, जबकि मौसमी चटर्जी उनके साथ रोमांस वाली भूमिका में थीं। शूटिंग के दौरान राजकुमार की एक अजीबोगरीब मांग ने पूरे यूनिट को सन्न कर दिया, लेकिन मौसमी ने अपने ताजे और चटपटे जवाब से माहौल हल्का कर दिया।

फिल्म की शूटिंग चंबल नदी के किनारे हो रही थी। एक दिन राजकुमार ने डायरेक्टर से कहा कि एक सीन ऐड करें, जिसमें वह और मौसमी नदी में साथ नहाते दिखें। उनका अंदाज हमेशा की तरह बिंदास था – 'जानी, तैरना सीख लो, हम साथ हैं तो डर किस बात का?' मौसमी, जो उस समय 70 के दशक की टॉप हीरोइन थीं, ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'राज जी, मुझे तैरना आता नहीं।' राजकुमार ने फिर जोश में कहा, 'डूब जाओगी नहीं, मेरा वादा है।' लेकिन मौसमी ने पलटकर ऐसा पलटवार किया कि सबकी हंसी छूट गई। उन्होंने कहा, 'अगर नदी में आपकी विग गिर गई तो आप मुझे बचाएंगे या अपनी विग को?' यह सुनते ही पूरा सेट सन्न रह गया। राजकुमार, जो विग पहनते थे, पहले तो चुप्पी साध गए, लेकिन बाद में खुद ही हंस पड़े।

यह किस्सा एक्टर रंजीत ने 'द कपिल शर्मा शो' पर सुनाया था। रंजीत, शत्रुघ्न सिन्हा, अमजद खान, प्रदीप कुमार और फरीदा जलाल जैसे सितारों के साथ फिल्म में थे। राजकुमार का अक्खड़ स्वभाव मशहूर था वे किसी से नहीं घबराते थे। मौसमी ने एक रियलिटी शो में बताया कि राज जी अपनी दुनिया में रहते थे और उन्हें 'जानी' बुलाते थे। लेकिन इस घटना ने उनकी हिम्मत दिखाई, क्योंकि उस दौर में सीनियर एक्टर्स की बात टालना आसान नहीं था। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रही, लेकिन ये किस्सा बॉलीवुड की पुरानी यादें ताजा करता रहता है।

मौसमी चटर्जी का कहना था कि काम के दौरान अनुशासन और पेशेवर रवैया सबसे ज़रूरी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि चाहे सामने कितना भी बड़ा कलाकार क्यों न हो, अगर मांग अनुचित है तो उसका विरोध करना चाहिए। इस घटना ने मौसमी की छवि को और भी मजबूत बना दिया। वह सिर्फ खूबसूरत अदाकारा ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और पेशेवर ईमानदारी की मिसाल भी बन गईं।


राजकुमार की शख्सियत हमेशा से रहस्यमयी और दबंग रही है। वह अपने अंदाज़ और डायलॉग्स से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखाया कि फिल्म इंडस्ट्री में हर किसी को बराबरी का हक है। मौसमी चटर्जी ने साबित कर दिया कि सच्चाई और साहस से किसी भी स्थिति का सामना किया जा सकता है।

यह किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय है। यह न सिर्फ उस दौर के कलाकारों के रिश्तों को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि बॉलीवुड में महिलाएं भी अपनी आवाज़ बुलंद कर सकती हैं। मौसमी चटर्जी का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है कि काम के दौरान आत्मसम्मान और पेशेवर ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।

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