बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सारा अली खान को एफिडेविट मांगने के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सारा भी सनातनी हैं, तो सत्य लिखने में हिचक क्यों है। ये बयान मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर छिड़ी बहस को नई ऊंचाई दे रहा है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने साफ कहा कि गैर-हिंदू भक्तों को दर्शन से पहले हिंदू धर्म में विश्वास का लिखित बयान देना होगा। स्टैंडर्ड एफिडेविट फॉर्मेट तैयार है। सारा अली खान का नाम इसलिए आया क्योंकि वे केदारनाथ की भक्त रही हैं। फिल्म 'केदारनाथ' की शूटिंग के बाद से नियमित विजिट करती रहीं। द्विवेदी बोले, "अगर सारा सनातन धर्म में आस्था जताकर एफिडेविट दें, तो दर्शन की अनुमति मिलेगी।"
कंगना ने जोर देकर कहा, "सब सनातनी हैं... यहां जो भी है सनातनी है। वो भी सनातनी है, तो सत्य लिखने में डर क्यों?" उन्होंने सनातन को 'अनादि-अनंत' बताया, जो सभी धर्मों से पुराना है। "सारे रिलिजन 1000-1500 साल पुराने हैं, सनातन ही सत्य है।" विपक्ष ने इसे विभाजनकारी बताया, लेकिन कंगना ने पलटवार किया—हिंदू धर्म एकजुट करता है, तोफा नहीं। सारा की चुप्पी ने बहस को और हवा दी।
सारा की आध्यात्मिक यात्रा
सारा ने सोशल मीडिया पर केदारनाथ के दर्शन की झलकियां शेयर कीं। सादगी से घूंघट ओढ़े भक्ति में लीन। 'मेट्रो...इन दिनो' के बाद वे आध्यात्मिक मोड़ ले चुकी हैं। समिति का नियम सभी पर लागू होने पर कोई छूट नहीं है। कंगना का बयान सारा को सीधा संदेश देता है कि आस्था जताओ, दर्शन पाओ।
धार्मिक स्थलों पर बहस तेज
ये विवाद ऑस्कर स्नब या बॉलीवुड विवादों से अलग, सनातन परंपराओं की रक्षा का सवाल उठाता है। कंगना की राजनीतिक एंट्री के बाद ऐसे बयान उनकी छवि को मजबूत कर रहे। सारा अगर एफिडेविट देंगी, तो बहस खत्म होगी नहीं तो सोशल मीडिया पर मीम्स का दौर चलेगा।
सारा अली खान, जो अक्सर केदारनाथ जाती रही हैं, ने इस विवाद पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वे पहले भी कई बार वहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर चुकी हैं। एक बार उन्होंने अपनी दोस्त जान्हवी कपूर के साथ यात्रा को “near-death experience” बताया था, जब वे खतरनाक रास्ते पर फंस गई थीं और बाद में बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकाला था।
कंगना का बयान इस बहस को और तेज कर रहा है क्योंकि उन्होंने इसे सनातन धर्म की सार्वभौमिकता से जोड़ा है। उनका कहना है कि सत्य लिखने में किसी को डरना नहीं चाहिए और यह नियम परंपरा की रक्षा के लिए है।
कुल मिलाकर, बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में शपथपत्र नियम अब एक बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कंगना रनौत का समर्थन इसे और चर्चित बना रहा है, जबकि सारा अली खान की चुप्पी इस विवाद को और दिलचस्प बना रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मंदिर समिति इस नियम को किस तरह लागू करती है और बॉलीवुड से जुड़े लोग इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।