Women's Day Special: बॉलीवुड की वो 8 फिल्में, जहां महिलाओं ने रचा इतिहास और बदली सोच... एक्ट्रेसेस ने अपने दम पर लिखी सफलता की कहानी

Women's Day Special: इंटरनेशनल विमेंस डे 2026 पर बॉलीवुड की 8 महिला-केंद्रित फिल्मों को याद किया गया, जिन्होंने साबित किया कि हीरोइन भी कहानी की असली नायक हो सकती है। इन फिल्मों ने समाज में महिलाओं की ताकत, संघर्ष और प्रेरणा को बड़े पर्दे पर जीवंत किया।

अपडेटेड Mar 07, 2026 पर 10:22 PM
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को आने वाला है, और इस मौके पर बॉलीवुड की उन फिल्मों को याद करना लाजमी है जिन्होंने न सिर्फ स्क्रीन पर महिलाओं की ताकत दिखाई, बल्कि समाज को आईना भी दिखाया। ये वुमन-सेंट्रिक सिनेमा कहानियां हैं मां की ममता से लेकर विद्रोह की आग तक। 'मदर इंडिया' से 'गंगूबाई काठियावाड़ी' तक, इन 8 फिल्मों ने साबित किया कि हीरोइनें ही असली हीरोज हैं। ये फिल्में प्रेरणा का खजाना हैं, जो हर उम्र की महिलाओं को कहती हैं – तुम्हारी ताकत असीमित है।

मदर इंडिया (1957)

नरगिस की यह फिल्म भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर है। राधा एक गरीब किसान की पत्नी से मां बनकर गांव की रीढ़ बनती है। बेटे बिरजू के डाकू बनने पर भी वो धर्म का साथ नहीं छोड़ती। बाढ़, सूखा और समाज के जुल्मों के बीच राधा की जंग दिल को छू जाती है। नेशनल अवॉर्ड जीतकर यह फिल्म साबित करती है कि ममता कभी हार नहीं मानती। आज 69 साल बाद भी इसका संदेश प्रासंगिक है कि महिलाएं परिवार और समाज की असली ताकत है।

कहानी (2012)

विद्या बालन की विद्या बागची कोलकाता की सड़कों पर गायब पति की तलफी में रहती है। सुजॉय घोष की थ्रिलर में एक प्रेग्नेंट महिला दुश्मनों को मात देती है। ट्विस्ट एंडिंग ने दर्शकों को हैरान कर दिया। फिल्म ने मातृत्व और हिम्मत को नया आयाम दिया। विद्या को नेशनल अवॉर्ड मिला, और यह साबित हुआ कि महिलाएं एक्शन हीरो भी हो सकती हैं।


इंग्लिश विंग्लिश (2012)

ग्रामीण गृहिणी शशि (श्रीदेवी) अंग्रेजी सीखने न्यूयॉर्क जाती हैं। गौतम वासुदेव मेनन की यह फिल्म आत्मविश्वास की कहानी है। शशि का ट्रांसफॉर्मेशन किचन से कॉन्फिडेंस तक हर महिला से जुड़ता है। श्रीदेवी का यह आखिरी बड़ा रोल था, जो उनकी जेनियस साबित हुआ। फिल्म ने भाषा और कल्चरल बैरियर्स तोड़े हैं।

क्वीन (2014)

कंगना रनौत की रानी पटेल पटियाला से दिल्ली, फिर इटली-अमस्टरडम तक। शादी टूटने के बाद अकेले हनीमून पर निकल पड़ती है। विकास बहल की यह रोड ट्रिप कॉमेडी महिलाओं को सिखाती है खुद से प्यार करो। कंगना का नेशनल अवॉर्ड जीतना डिजर्व्ड था। आज भी युवा लड़कियां इसे देखकर हिम्मत पाती हैं।

मर्दानी (2014)

रानी मुखर्जी पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवानी रॉय बनकर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ती हैं। प्रदीप सरकार की फिल्म में रानी का एक्शन और इमोशन कमाल का है। समाज के अंधेरे को दिखाते हुए यह कहती है – महिलाएं कमजोर नहीं। सीक्वल तक बनी यह फ्रेंचाइजी वुमन एम्पावरमेंट का सिंबल बनी।

गंगूबाई काठियावाड़ी (2022)

संजय लीला भंसाली की यह बायोपिक गंगूबाई (आलिया भट्ट) की कहानी है छोटे शहर से मुंबई के रेड लाइट एरिया की क्वीन। कमाठिपुरा में सत्ता हासिल करने तक का सफर प्रेरणादायक। आलिया को नेशनल अवॉर्ड मिला। फिल्म ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों को आवाज दी।

मॉम (2017)

स्रीदेवी देवकी सबरवाल बेटी के रेप के बाद न्याय के लिए जंग लड़ती हैं। रवि उदयावराव की थ्रिलर में स्रीदेवी का ट्रांसफॉर्मेशन हिला देने वाला। कानून फेल होने पर मां का इंसाफ फिल्म ने जेंडर जस्टिस पर बहस छेड़ी। श्रीदेवी को स्पेशल अवॉर्ड मिला था।

ये फिल्में साबित करती हैं कि बॉलीवुड में महिलाएं सिर्फ ग्लैमर नहीं, ताकत का प्रतीक हैं। 2026 में तापसी पन्नू की 'गंधारी' जैसी नई फिल्में आ रही हैं। महिला दिवस पर इन्हें दोबारा देखें।

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