5 नन्हे ओरंगुटान बने भारत के VIP मेहमान! कैसे आए भारत ? जानिए इनके रहस्यमयी सफर की पूरी कहानी

ओडिशा के बालेश्वर जंगलों से रेस्क्यू किए गए 5 नन्हे ओरंगुटान अब भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर के खास मेहमान बन चुके हैं। इंडोनेशिया और मलेशिया में पाई जाने वाली यह प्रजाति आखिर भारत कैसे पहुँची? पढ़ें पूरी खबर...

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 8:02 PM
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5 नन्हे ओरंगुटान बने भारत के VIP मेहमान!

रहस्यमयी सफर तय कर भारत आए 5 नन्हे ओरंगुटान अब देश के VIP मेहमान बन गए हैं। नन्हे ओरंगुटान की क्यूट हरकतों के वीडियो पूरे देश में वायरल हो रहे हैं। लोग भी इन पर खूब प्यार लुटा रहे हैं। पांचों नन्हे ओरंगुटानों का जंगल से रेस्क्यू करने के बाद इन्हें सीधा भुवनेश्वर के सबसे मशहूर नंदनकानन चिड़ियाघर लाया गया है। यहां पहुंचते ही ये मासूम बेजुबान चिड़ियाघर के सबसे खास और VIP मेहमान बन गए हैं। फिलहाल इन्हें अभी दूसरे वन्यजीवों से अलग क्वारंटीन में रखा गया है. यहां उनकी सेहत और व्यवहार पर नजर रखी जा रही है।

आखिर कैसे भारत पहुंचे 5 नन्हे ओरंगुटान?

वायरल हो रहे पांचों नन्हे ओरंगुटान आपको जितने क्यूट और मासूम लग रहे हें उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प और रहस्यमयी कहानी है इन पांचों के भारत आने की. ओडिशा के जंगलों में अचानक पांच ऐसे नन्हे जीव मिलते हैं, जो भारत के पूरे नक्शे पर कहीं पाए ही नहीं जाते! यह कोई आम जानवर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के घने वर्षावनों में रहने वाले ओरंगुटान थे। आखिर जो जीव भारत की धरती का है ही नहीं, वह अचानक यहां पहुंचा कैसे? क्या ये अंतरराष्ट्रीय तस्करी का शिकार हुए या इसके पीछे कोई गहरा राज़ है?


बालेश्वर जिले के सुनसान जंगल में जब स्थानीय लोगों ने बेबस हालत में घूमते इन पांच मासूमों को देखा तो सभी के होश उड़ गए। खबर मिलते ही तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर इन नन्हे मेहमानों को सुरक्षित बचाया गया और सीधा भुवनेश्वर के प्रसिद्ध नंदनकानन चिड़ियाघर  लाया गया।

5 नन्हे ओरंगुटानों की VIP खातिरदारी

जंगल से रेस्क्यू के बाद इन्हें सीधा भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर लाया गया है। यहां पहुंचते ही ये मासूम बेजुबान चिड़ियाघर के सबसे खास और VIP मेहमान बन गए हैं। फिलहाल, किसी भी तरह के बाहरी संक्रमण या बीमारी के खतरे को टालने के लिए इन्हें सख्त क्वारंटीन में रखा गया है।

फिलहाल, किसी भी तरह के बाहरी संक्रमण या बीमारी से बचाने के लिए इन्हें 30 दिनों के सख्त क्वारंटीन में रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे से इन पर लगातार नज़र रखी जा रही है। 3 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स और केयरटेकर्स की टीम दिन-रात उनकी देखभाल में लगाई है। देखभाल करने वाले कर्मचारियों को उनके पास केवल मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइज़र के साथ पूरी सुरक्षा में जाने की ही अनुमति है। पांचों नन्हे ओरंगुटानों की शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट राहत देने वाली है. पांचों नन्हे ओरंगुटान पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर हैं।

अंतरराष्ट्रीय तस्करी, या कोई बड़ा रहस्य

पांचों नन्हे ओरंगुटान नंदनकानन में अपने नए आशियाने से घुल-मिल रहे हैं, लेकिन सवाल अभी भी यही है कि आखिर किसने इनको इस हाल में जंगल में छोड़ा होगा। क्या ये पांचों ओरंगुटान किसी अंतरराष्ट्रीय तस्करी का हिस्सा हैं सवाल कई हैं जिनकी जांच चल रही है. ओरंगुटान भारत की मूल प्रजाति भी नहीं हैं। इसलिए अभी जांच चल रही है लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय वाइल्डलाइफ स्मगलिंग रैकेट के जरिए अवैध तरीके से भारत लाया गया होगा शायद पुलिस और वन विभाग की मुस्तैदी देखकर तस्कर घबरा गए और पकड़े जाने के डर से इन्हें जंगल में ही छोड़कर भाग निकले।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा क्राइम ब्रांच की STF यानी   स्पेशल टास्क फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने मोर्चा संभालते हुए. तस्करों के रूट और इस इंटरनेशनल सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए गहन जांच शुरू कर दी है

जाँच एजेंसियां इन पांचों ओरंगुटानों के रहस्यमयी सफर की कड़ियों को जोड़ रही हैं, तब तक नंदनकानन प्रशासन इन पाँचों क्यूट ओरंगुटानों की पूरी मेहमाननवाजी में जुटा गया है। एक महीने की क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद ही डॉक्टर्स की फाइनल रिपोर्ट के आधार पर इन्हें बाड़े में शिफ्ट करने का फैसला लिया जाएगा। खतरनाक जंगल से बाल-बाल बचे ये पाँचों नन्हे ओरंगुटान अब सुरक्षित हाथों में हैं, और भारत में उन्हें एक नया जीवन और ढेर सारा प्यार भी मिल रहा है।

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