जल बोर्ड टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन, AAP नेता सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, 1.52 करोड़ की रिश्वत का आरोप

Satyendar Jain: एसीबी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें और नियम शामिल किए गए, जिनसे एक खास कंपनी को फायदा पहुंच सकता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शर्तों से यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एसीबी का कहना है कि टेंडर की शर्तों ने दूसरी कंपनियों के लिए मुकाबले का मौका सीमित कर दिया और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ मिला

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 10:35 PM
आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने गिरफ्तार किया है।

दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े टेंडरों में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के मामले में की गई है। सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, पूर्व कॉन्ट्रैक्ट सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को बेहतर बनाने और अपग्रेड करने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में कथित तौर पर बदलाव किए गए और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एसीबी इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ कर रही है और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी की जांच की जा रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस


एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 409, 418 और 120-बी भी लगाई गई हैं।

टेंडर की शर्तों में हेरफेर का आरोप

एसीबी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें और नियम शामिल किए गए, जिनसे एक खास कंपनी को फायदा पहुंच सकता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शर्तों से यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एसीबी का कहना है कि टेंडर की शर्तों ने दूसरी कंपनियों के लिए मुकाबले का मौका सीमित कर दिया और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ मिला।

जांच में टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं भी सामने आई हैं। इनमें प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट का नहीं किया जाना, इस्तेमाल होने वाली तकनीक या फिल्टर मीडिया को लेकर ऐसी शर्तें रखना जिनसे दूसरी कंपनियों की भागीदारी सीमित हो सकती थी, साफ किए गए पानी की गुणवत्ता के लिए जरूरी मानक तय नहीं करना और बाद में टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव करना शामिल है। एसीबी अब इन सभी आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर और किसके निर्देश पर हुआ।

एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने कहा कि टेंडर की शर्तों में किए गए कथित बदलावों से सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ा। एजेंसी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच में प्राइवेट कंपनियों के लोगों, सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों के बीच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर की शर्तों, उनमें किए गए बदलाव और दूसरे दस्तावेजों को लेकर बातचीत के सबूत मिले हैं। एसीबी का कहना है कि बातचीत में जिन कई शर्तों और दस्तावेजों का जिक्र था, उन्हें बाद में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से जारी किए गए टेंडर में शामिल कर लिया गया। जांच एजेंसी को शक है कि प्राइवेट कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत हुई थी। इसका मकसद एक खास तकनीक देने वाली कंपनी के पक्ष में टेंडर की शर्तों को प्रभावित करना था।

पूर्व सीईओ को 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोप

एसीबी ने आरोप लगाया है कि सृजनहार और एएन एंटरप्राइजेज जैसी बीच की कंपनियों के जरिए कमीशन या रिश्वत के तौर पर पैसों का लेन-देन किया गया। एजेंसी के मुताबिक, वित्तीय जांच में पता चला कि यूरोटेक से कथित तौर पर जुड़ी कंपनियों से आरोपी नागेंद्र यादव की कंपनी में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। एसीबी अब इन पैसों के लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया के बीच संबंध की जांच कर रही है। एसीबी का यह भी आरोप है कि इस पूरे मामले में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय को कथित तौर पर 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने आरोप लगाया है कि बाद में यह रकम दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके कुछ रिश्तेदारों के बैंक खातों में भेजी गई।एसीबी ने अपने बयान में कहा कि जांच के दौरान पता चला है कि उस समय दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ रहे उदित प्रकाश राय को एएन एंटरप्राइजेज के जरिए बैंकिंग चैनल से करीब 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मिली। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम राय के अलावा उनके कुछ रिश्तेदारों के बैंक खातों में भी ट्रांसफर की गई थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में इस पैसे का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। एसीबी का यह भी कहना है कि एएन एंटरप्राइजेज के जरिए भेजी गई रकम कथित तौर पर तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी यूरोटेक से जुड़ी थी। एसीबी ने बताया कि वह इस मामले में पैसों के पूरे लेन-देन की कड़ी यानी मनी ट्रेल की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित भ्रष्टाचार से हासिल रकम कहां-कहां इस्तेमाल हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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