Abhishek Banerjee Attack: 'हीरो बनने के लिए वहां क्यों गए?'; ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले में 5 गिरफ्तार, BJP-TMC में सियासी संग्राम

Abhishek Banerjee Attack: पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने रविवार (31 मई) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले की निंदा की। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह पूर्व सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लोगों के बढ़ते गुस्से को दिखाता है। घोष ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल के लोग TMC शासन में सालों से परेशान हैं

अपडेटेड May 31, 2026 पर 11:21 AM
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Abhishek Banerjee Attack: बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को जानलेवा हमला हुआ

Abhishek Banerjee Attack: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के सिलसिले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में तपन माइती और आकाश शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर इस घटना से जुड़े वीडियो में देखा गया था। इस बीच, बंगाल के मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता दिलीप घोष ने रविवार (31 मई) को TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले की निंदा की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह पूर्व सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लोगों के बढ़ते गुस्से को दिखाता है।

इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल के लोग TMC शासन में सालों से परेशान हैं। साथ ही घोस ने कहा कि क्यों अभिषेक हीरे बनने के लिए वहां गए? उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 22 गाड़ियों का काफिला लेकर घूमता रहा यदि वो ऐसे हीरो बनने का प्रयास करेगा तो क्या होगा? मंत्री ने कहा कि जनता ने सब देखा है और वो केवल अवसर ढूंढ रहे थे।

मामले में 5 गिरफ्तार


पुलिस ने जांच के सिलसिले में पांच लोगों को हिरासत में लिया है। अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में भीड़ ने हमला किया, जहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने गए थे। TMC प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दोषी ठहराया। हालांकि, सत्ताधारी पार्टी ने इस आरोप से इनकार किया है। इस घटना के बारे में बात करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल के पुलिस अधिकारी अभिषेक बनर्जी को मेडिकल इलाज मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

दिलीप घोष ने कहा, "अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ है वो नहीं होना चाहिए था। कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है लेकिन पिछले 15 साल से जनता जो सहन कर रही है। एक-एक व्यक्ति को परेशान किया गया। जनता के अंदर का जो रोष है वो कहीं न कहीं तो दिखेगा ही। चुनाव परिणामों को देखते हुए आपको (अभिषेक बनर्जी) स्थिति को समझ जाना चाहिए था। क्यों आप हीरो बनने के लिए वहां गए? जो व्यक्ति 22 गाड़ियों का काफिला लेकर घूमता रहा यदि वो ऐसे हीरो बनने का प्रयास करेगा तो क्या होगा?... जनता ने सब देखा है और वो केवल अवसर ढूंढ रहे थे। आप(अभिषेक बनर्जी) लोगों को अवसर ही क्यों दे रहे हैं?"

अभिषेक पर कैसे हुआ हमला?

सोनारपुर इलाके में चुनाव बाद हिंसा के पीड़ितों के परिवारों से मिलने पहुंचे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ शनिवार 30 मई को दुर्व्यवहार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने उन पर अंडे, जूते तथा पत्थर फेंके। इस दौरान बनर्जी क्रिकेट हेलमेट पहनकर और अपने सहयोगियों की मदद से बड़ी मुश्किल से भीड़ के बीच से निकल सके। बाद में बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता उन्हें जान से मारने की कोशिश कर रहे थे।

नाटकीय और अभूतपूर्व तरीके से फूटे जनता के गुस्से के तहत अज्ञात लोगों ने बनर्जी के साथ हाथापाई की। 'चोर-चोर' के नारे लगाते हुए उनके साथ धक्का-मुक्की की। हालात देखते ही देखते अराजकता में तब्दील हो गए। भीड़ के कुछ सदस्यों ने कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी पर लात-घूंसे बरसाकर उन पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा।

सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा उपलब्ध कराया गया हेलमेट पहने टीएमसी नेता की कमीज झड़प के दौरान फट गई थी, जो घटना की हिंसक प्रकृति को दर्शाती है। राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका के वार्ड 9 के अंतर्गत आने वाले कामराबाद इलाके में स्थानीय महिलाओं द्वारा किए गए इस हमले को कथित तौर पर टीएमसी द्वारा संचालित गिरोहों और जबरन वसूली करने वाले गिरोहों द्वारा वर्षों से किए जा रहे उत्पीड़न और सुशान के घोर अभाव के कारण पनपे गुस्से का विस्फोट माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि बनर्जी द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान दी गई कथित अप्रत्यक्ष धमकियों के कारण भी हिंसा भड़की। बनर्जी मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर इलाके में एंट्री करने की कोशिश कर रहे थे, तभी उत्तेजित स्थानीय लोग उनके चारों ओर इकट्ठा हो गए और नारे लगाने लगे। इस दौरान उन पर जूते और अंडे फेंकने लगे, जिसके चलते उन्हें बाइक से उतरना पड़ा।

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विरोध के बावजूद, सांसद ने लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित अपने मंजिल तक पैदल जाने का फैसला किया, इससे स्थिति और भी अराजक हो गई। सैकड़ों उत्तेजित स्थानीय लोगों ने हिंसक तरीके से उनका रास्ता रोकने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि हमले के समय घटनास्थल पर पुलिस मौजूद नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस नहीं आती, वे इलाका नहीं छोड़ेंगे।

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