IndiGo Crisis: पिछले दिनों इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन संकट के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बाजार में कॉम्पिटिशन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए दो नए आवेदको 'अल हिंद एयर' (Al Hind Air) और 'फ्लाई एक्सप्रेस' (FlyExpress) को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दे दिया है। मंत्री राम मोहन नायडू के इस फैसले का सीधा मकसद एयरलाइन सेक्टर में चल रही दो बड़ी कंपनियों (इंडिगो और एयर इंडिया) की दादागिरी को कम करना और यात्रियों को बेहतर ऑप्शन उपलब्ध कराना है।
भारतीय विमानन बाजार इस समय एक ऐसी स्थिति में है जहां इंडिगो के पास 60% और टाटा की एयर इंडिया के पास 25% हिस्सेदारी है। यानी लगभग 90% मार्केट सिर्फ दो हाथों में है। हाल ही में जब इंडिगो ने क्रू-रोस्टरिंग के नए नियम लागू किए, तो पूरे देश में सैकड़ों उड़ानें रद्द हो गईं और हजारों यात्री फंस गए। इस घटना ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर एक ही एयरलाइन पर इतना बोझ रहेगा, तो पूरा सिस्टम कभी भी ठप हो सकता है। इसी 'एकाधिकार' को तोड़ने के लिए नए खिलाड़ियों को मैदान में उतारा जा रहा है।
मंत्री राम मोहन नायडू ने पिछले एक हफ्ते में तीन नई एयरलाइन्स की टीमों से मुलाकात की है:
शंख एयर (Shankh Air): इसे पहले ही NOC मिल चुका है। यह एयरलाइन उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, वाराणसी, आगरा और गोरखपुर को मेट्रो शहरों से जोड़ने पर ध्यान देगी।
अल हिंद एयर (Al Hind Air): यह केरल स्थित प्रसिद्ध 'अलहिंद ग्रुप' का हिस्सा है, जिसकी ट्रैवल सेक्टर में पहले से मजबूत पकड़ है।
फ्लाई एक्सप्रेस (FlyExpress): इसे हैदराबाद की एक कूरियर और कार्गो सर्विस कंपनी का समर्थन प्राप्त है, जो अब पैसेंजर सेक्टर में कदम रख रही है।
NOC मिल गया, लेकिन उड़ान भरने में लगेगा काफी वक्त
सरकार से NOC मिलना पहली बड़ी जीत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत ही इनके विमान उड़ने लगेंगे। अब इन कंपनियों को AOC (एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट) के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की कड़ी परीक्षा पास करनी होगी। उन्हें साबित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त पैसा, ट्रेंड पायलट और क्रू हैं, और उनके सुरक्षा मानक विश्व स्तरीय हैं। इसके बाद 'प्रूविंग फ्लाइट्स' (ट्रायल रन) होंगी, तब कहीं जाकर यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग शुरू होगी।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
जब बाजार में नई कंपनियां आती हैं, तो सबसे बड़ा फायदा आम आदमी की जेब को होता है।
किराये में कमी: ज्यादा एयरलाइन्स होने से टिकट की कीमतों में होड़ मचती है।
बेहतर कनेक्टिविटी: छोटे शहरों टियर-2 और टियर-3 से उड़ानों की संख्या बढ़ेगी।
कई ऑप्शन: इंडिगो या एयर इंडिया में तकनीकी खराबी होने पर यात्रियों के पास दूसरी एयरलाइन चुनने का मौका होगा।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की 'उड़ान' (UDAN) योजना के तहत स्टार एयर और फ्लाई-91 जैसी छोटी कंपनियों ने पहले ही छोटे शहरों को जोड़ा है, और अब ये नई एयरलाइन्स इस बदलाव को और तेज करेंगी।