Ashwini Vaishnaw: दिल्ली में चल रहे 'AI इम्पैक्ट समिट' के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया कंपनियों की उन शिकायतों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने के नियम को लागू करना मुश्किल बताया जा रहा था। मंत्री ने साफ कहा कि बड़ी टेक कंपनियों के पास इतनी उन्नत तकनीक है कि वे घंटों नहीं, बल्कि मिनटों में कार्रवाई कर सकती हैं।
'3 घंटे नहीं, 5 मिनट में होनी चाहिए कार्रवाई'
आईटी मंत्री ने एक इंटरव्यू में कहा कि एआई द्वारा बनाया गया भ्रामक कंटेंट जिस रफ्तार से वायरल होता है, उसे देखते हुए 3 घंटे का समय भी बहुत ज्यादा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, 'बड़ी टेक कंपनियों के पास 3 घंटे के नोटिस को लागू करने के लिए पर्याप्त उपकरण और तकनीकी कौशल है। असल में तो यह काम 5 मिनट में होना चाहिए।' उनका मानना है कि जब तकनीक इतनी तेज है, तो सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदम भी उतने ही तेज होने चाहिए। मंत्री के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल सुरक्षा और डीपफेक जैसे खतरों से निपटने के लिए कंपनियों को कोई ढील देने के मूड में नहीं है।
मेटा की दलीलों पर केन्द्रीय मंत्री का पलटवार
मंत्री का यह बयान मेटा के वाइस प्रेसिडेंट रॉब शर्मन की उस टिप्पणी के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 3 घंटे में कंटेंट की कानूनी वैधता की जांच करना और उसे हटाना 'ऑपरेशनल' तौर पर बहुत कठिन है। शर्मन का तर्क था कि यह केवल नियम मानने की इच्छा का सवाल नहीं है, बल्कि इतने कम समय में सही फैसला ले पाने की क्षमता का है। हालांकि, अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कर दिया कि कंपनियों की "तकनीकी क्षमता" पर उन्हें कोई संदेह नहीं है और वे इसे आसानी से कर सकती हैं।
क्या है नया नियम और क्यों है विरोध?
सरकार ने हाल ही में 'आईटी नियम, 2021' में संशोधन किया है। इसके तहत पहले अदालती आदेश या सरकारी निर्देश मिलने पर कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है। टेक कंपनियों और इंडस्ट्री बॉडीज का तर्क है कि इतने कम समय के दबाव में वे गलती से ऐसा कंटेंट भी हटा सकते हैं जो गैर-कानूनी न हो। उन्हें डर है कि इससे काम का बोझ बढ़ेगा और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी असर पड़ सकता है।
21 फरवरी तक चलेगा AI इम्पैक्ट समिट
आईटी सचिव ने जानकारी दी है कि दिल्ली में चल रहे 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' की अवधि को एक दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है। अब यह आयोजन 21 फरवरी तक चलेगा। सरकार का मानना है कि एआई के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है।