West Asia War: एयर इंडिया ने पश्चिम एशिया के लिए रद्द की 2,500 फ्लाइट्स, सिर्फ 30% क्षमता पर काम कर रही एयरलाइन

West Asia War: ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण एयर इंडिया ने पिछले तीन हफ्तों में पश्चिम एशिया के लिए लगभग 2,500 फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में एयरलाइन का ऑपरेशंस अपने सामान्य शेड्यूल के केवल 30% पर चल रहा है। इस रुकावट का असर अब इस क्षेत्र पर आर्थिक रूप से भी पड़ने लगा है

अपडेटेड Mar 22, 2026 पर 8:57 AM
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West Asia War: एयर इंडिया ने 3 सप्ताह में पश्चिम एशिया के लिए जाने वाली 2,500 उड़ानें रद्द की है

West Asia War: एयर इंडिया ने पिछले तीन हफ्तों में पश्चिम एशिया के लिए लगभग 2,500 उड़ानें रद्द कर दी है। एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को भेजे एक अंदरूनी संदेश में बताया कि ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण एयरलाइन अभी इस क्षेत्र में अपने सामान्य शेड्यूल का सिर्फ 30% ही चला पा रही है। विल्सन ने अपने संदेश में कहा, "दुनिया, हमारा क्षेत्र और हमारा उद्योग, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के असर से जूझ रहा है... एयर इंडिया ग्रुप पर इसका काफी गहरा असर पड़ा है, क्योंकि मध्य पूर्व के लिए और वहां से होकर हमारी उड़ानें बड़े पैमाने पर चलती हैं।"

'हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक उन्होंने आगे कहा, "संघर्ष शुरू होने के बाद के तीन सप्ताह में हमें इस क्षेत्र के लिए लगभग 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। आज की तारीख में हम मध्य पूर्व के अपने सामान्य शेड्यूल का सिर्फ 30% ही चला पा रहे हैं, क्योंकि वहां के हवाई अड्डे या हवाई क्षेत्र बंद हैं। या फिर उन्हें हमारी सुरक्षा सीमाओं से बाहर माना गया है।"

विल्सन ने बताया कि इस रुकावट का असर अब इस क्षेत्र पर आर्थिक रूप से भी पड़ने लगा है, क्योंकि जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। उन्होंने कहा, "इसका ज्यादातर असर हमें अगले महीने से महसूस होगा।" उन्होंने यह भी बताया कि बढ़ती लागत की कुछ हद तक भरपाई करने के लिए एयरलाइन ने नए टिकटों पर पहले ही 'फ्यूल सरचार्ज' लगा दिया है।


उन्होंने कहा, "UK, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए जाने वाली दूसरी उड़ानों के रास्ते भी बदले जा रहे हैं। ये रास्ते उन पहले से ही लंबे रास्तों से भी अधिक लंबे हैं, जिनका इस्तेमाल हम पिछले साल 'पहलगाम घटना' के बाद से कर रहे हैं। इससे फ्यूल ज्यादा खर्च हो रहा है। साथ ही सफर में ज्यादा समय लग रहा है।"

हालांकि, उन्होंने व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के बीच यात्रा की मांग में आ रही कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "हर ग्राहक ज्यादा हवाई किराया देने को तैयार नहीं होता। इसलिए हम किराए की कीमत एक सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते, क्योंकि ऐसा करने पर मांग में गिरावट आ सकती है।"

इसके साथ ही, एयरलाइन को यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे बाजारों में नई मांग के कुछ संकेत भी दिख रहे हैं। इन जगहों पर एयरलाइन अतिरिक्त उड़ानें शुरू कर रही है। जबकि कुछ दूसरी वैश्विक एयरलाइंस फ्यूल की ज्यादा कीमतों के कारण अपनी उड़ानों की संख्या में कटौती कर रही हैं।

विल्सन ने कहा, "फ्यूल की कीमतें, हवाई किराया और ग्राहकों की मांग किस दिशा में जाती है, इस पर निर्भर करते हुए हमें भी अपने फैसलों में बदलाव करना पड़ सकता है। फैलहाल... हमें सुरक्षित उड़ानें सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। गैर-जरूरी या अनावश्यक खर्चों पर पहले से भी ज्यादा सख्त नियंत्रण रखना चाहिए। एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए और एयर इंडिया की बेहतरीन सेवाएं देना जारी रखना चाहिए।"

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उन्होंने कर्मचारियों को पेश आ रही ऑपरेशनल चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि माहौल में बदलाव के अनुसार अपने ऑपरेशन्स में जरूरी फेरबदल कर रही हैं। CEO ने कहा कि Air India का नेटवर्क और उड़ान कार्यक्रम काफी अस्थिर हो गए हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों का इस व्यवधान को संभालने के लिए आभार व्यक्त किया।

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