बेंगलुरु में मंगलवार को एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया। 34 साल के वेंकटरमणन को अस्पताल और सड़क पर चल रहे लोगों से कोई मदद नहीं मिली। बाद में उनका एक्सीडेंट हो गया। वे सड़क पर दर्द से तड़पते रहे। उनकी पत्नी हाथ जोड़कर मदद मांगती रही, लेकिन कोई आगे नहीं आया और आखिरकारी वेंकटरमणन ने सड़क पर ही दम तोड़ दिया।
NDTV के मुताबिक, उनकी पत्नी ने रोते हुए कहा, “इंसानियत मेरे पति को बचा नहीं सकी। मैं खून से लथपथ थी और मदद के लिए गिड़गिड़ा रही थी, लेकिन कोई नहीं रुका।”
लेकिन इस दुख के बाद भी परिवार ने इंसानियत नहीं छोड़ी। उन्होंने वेंकटरमणन की आंखें दान कर दीं, ताकि उनकी मौत से किसी और को रोशनी मिल सके।
वेंकटरमणन बालाजी नगर के रहने वाले थे और एक गैराज में मैकेनिक का काम करते थे। 16 दिसंबर की सुबह करीब 3:30 बजे उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। वे और उनकी पत्नी इलाज के लिए मोटरसाइकिल से निकले, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह सफर एक बुरा सपना बन जाएगा।
उनकी पत्नी ने बताया, “उन्हें सीने में दर्द हो रहा था। हम पहले अस्पताल गए, लेकिन डॉक्टर मौजूद नहीं थे। दूसरे अस्पताल में कहा गया कि उन्हें स्ट्रोक हुआ है और हमें किसी और अस्पताल जाने को कहा गया। हमने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन ठीक से मदद नहीं मिली। इंसानियत हार गई, लेकिन हमने उनकी आंखें दान कर दीं।”
दो बार अस्पताल से लौटाए जाने के बाद सड़क पर उनका एक्सीडेंट हो गया। CCTV फुटेज में दिखा कि उनकी पत्नी सड़क पर पड़े अपने पति के लिए हर गुजरती गाड़ी से मदद मांग रही थी, लेकिन कोई नहीं रुका।
कुछ मिनटों बाद एक कैब ड्राइवर रुका और उन्हें पास के अस्पताल ले गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वेंकटरमणन की मां, जिन्होंने अपना आखिरी बेटा खो दिया, बस इतना ही कह सकीं, “मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं। मेरा बेटा चला गया।”
उनकी सास ने कहा, “सरकार को समझना चाहिए कि यह एक मेडिकल इमरजेंसी थी। मेरी बेटी के दो छोटे बच्चे हैं। अब उनकी देखभाल कौन करेगा?”
वेंकटरमणन के परिवार में अब उनकी पत्नी, मां और दो बच्चे बचे हैं- एक पांच साल का बेटा और 18 महीने की बेटी।