राजधानी दिल्ली के करीब ग्रेटर नोएडा में बीते दिनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले से पूरा देश हैरान है। 27 साल के एक टेक प्रोफेशनल की डूबने से मौत के बाद नोएडा प्रशासन पर लापरवाही के सवाल उठ रहे हैं। बीते शुक्रवार को इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी और उनकी डूबने से मौत हो गई। वहीं इसी मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी का नाम केस में शामिल था और उसे नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन की टीम ने हिरासत में ले लिया।
अभाय कुमार नॉलेज पार्क इलाके में स्थित एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट MZ विस्टाउन के मालिक हैं। यह गिरफ्तारी इंजीनियर की मौत से जुड़े हालात की जांच के बाद हुई है, जिसमें बिल्डर कथित तौर पर शामिल था।
ट्रक ड्राइवर ने बताई खौफनाक कहानी
वहीं एक ट्रक ड्राइवर गुरविंदर सिंह ने एक हैरान कर देने वाला खुलासा किया है। गुरविंदर सिंह, करीब दो हफ्ते पहले उसी जगह हुए एक हादसे में बाल-बाल बच गए थे।NDTV से बता करते हुए गुरविंदर सिंह ने बताया, “नाला और खाई सड़क से सिर्फ़ 10 कदम की दूरी पर हैं, लेकिन वहां न तो कोई साइनबोर्ड लगा है और न ही बैरिकेड। मेरा ट्रक नाले की दीवार से टकराया और आगे निकल गया। आगे के टायर हवा में लटक गए थे और बीच वाले टायर दीवार में फंस गए। मैं किसी तरह ट्रक से कूद गया और गर्दन तक पानी में जा गिरा। रात करीब 12:30 बजे मैं खाई में गिरा था। सुबह करीब 4 बजे कुछ स्थानीय लोगों ने मेरी मदद की। गिरने के करीब दो घंटे बाद दो पुलिसकर्मी आए, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की। अगर जिला प्रशासन चाहता, तो उसी समय एक एक्सकेवेटर बुलाया जा सकता था।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या नोएडा अथॉरिटी की कोई टीम उनकी मदद के लिए पहुंची थी, तो गुरविंदर सिंह का जवाब हैरान करने वाला था। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी की एक टीम दोपहर के समय आई और उनसे यह पूछने लगी कि टूटी हुई दीवार का भुगतान कौन करेगा। इस पर उन्होंने कहा कि वह तो मुश्किल से अपनी जान बचा पाए हैं। गुरविंदर ने यह भी बताया कि हादसे में उन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं और इस डरावने अनुभव के बाद से उन्हें बोलने में भी दिक्कत हो रही है और वह हकलाने लगे हैं।
घटना के 18 दिन बाद हुआ ये दूसरा हादसा
वहीं गुरविंदर सिंह के हादसे के करीब 18 दिन बाद एक और दर्दनाक घटना सामने आई। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता शुक्रवार देर रात गुरुग्राम में अपने दफ्तर से सेक्टर 150 स्थित घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरी। करीब डेढ़ घंटे तक चले रेस्क्यू के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और वे खाई में डूब गए। अगली सुबह उनका शव बरामद हुआ, जबकि उनकी कार अब तक नहीं मिल पाई है। गुरविंदर सिंह ने आगे कहा, “एक आदमी की जान चली गई। कौन जानता है आगे और कितने लोग मरेंगे। वहां न तो कोई बैरिकेड है और न ही कोई साइनबोर्ड। इसके लिए पूरा प्रशासन जिम्मेदार है। अगर प्रशासन चाहता, तो कुछ ही मिनटों में एक्सकेवेटर मौके पर पहुंच सकता था।
युवराज मेहता की मौत के बाद नोएडा प्रशासन के इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौजूद होने के बावजूद युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए लोकेश एम, जो नोएडा अथॉरिटी के CEO थे, उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है।