बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के कारण इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ओडिशा के पूर्व सीसएम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसके चलते सस्मित पात्रा ने निशिकांत दूबे की अध्यक्षता वाली संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति से इस्तीफा दिया है। बता दें कि, निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने 1960 के दशक में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच एक कड़ी के रूप में काम किया था।
बीजेडी सांसद ने दिया इस्तीफा
सस्मित पात्रा ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे ऐसे व्यक्ति के साथ इस समिति में काम जारी नहीं रख सकते, जिसने एक सम्मानित नेता के बारे में “अपमानजनक टिप्पणियां” की हों। वहीं संचार और आईटी से जुड़ी स्थायी समिति से इस्तीफा देने के बाद, सस्मित पात्रा ने कहा कि वे निशिकांत दुबे द्वारा बीजू पटनायक को लेकर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि ये बयान न सिर्फ शर्मनाक हैं, बल्कि पूरी तरह गलत भी हैं। सस्मित पात्रा ने कहा कि दुबे ने जवाहरलाल नेहरू और अमेरिका से जुड़े जो संदर्भ दिए, वे भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
उन्होंने आगे बताया कि बीजू पटनायक ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रूस की मदद की थी और नाज़ियों के खिलाफ अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, 1947 में जब भारतीय सैनिकों को कश्मीर ले जाया जा रहा था, तब उन्होंने खुद विमान उड़ाकर सैनिकों को वहां पहुंचाया था। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को पूरा देश जानता है। सस्मित पात्रा ने कहा कि इतनी महान हस्ती के बारे में इस तरह के बयान देना बेहद निंदनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसी किसी समिति का हिस्सा नहीं रह सकते, जिसकी अध्यक्षता निशिकांत दुबे कर रहे हों। इसी वजह से उन्होंने संचार और आईटी समिति से इस्तीफा दे दिया है।
बता दें कि, यह विवाद शुक्रवार को शुरू हुआ, जब निशिकांत दुबे ने एक्स पर कई पोस्ट के जरिए आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 1960 के दशक में नेहरू-गांधी परिवार “अमेरिका के लिए काम करता था।” अपनी पोस्ट में निशिकांत दुबे ने लिखा कि 27 मार्च 1963 को ओडिशा के उस समय के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिका गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि 1962 में भारत-चीन युद्ध अमेरिका के कहने और उसकी मदद से लड़ा गया था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बीजू पटनायक ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच एक अहम कड़ी के रूप में काम किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान बीजू पटनायक ने मदद पहुंचाई और भारत के रणनीतिक मामलों में अमेरिका की भूमिका को आसान बनाया। अपनी पोस्ट में उन्होंने दलाई लामा के भाई और अमेरिकी मदद से जुड़े कुछ दावों का भी जिक्र किया।