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Blue straggler star: पहली बार अंतरिक्ष में बनता दिखा 'ब्लू स्ट्रैग्लर' तारा, साथी तारे से खुराक लेकर कैसे हो रहा जवान, ये रहस्य भी खुला

Blue straggler star: भारतीय खगोलविदों ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक 'ब्लू स्ट्रैगलर स्टार' (Blue Straggler Star- BSS) को बनते हुए देखा है। यह खोज बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jul 28, 2026 पर 1:20 PM
Blue straggler star: पहली बार अंतरिक्ष में बनता दिखा 'ब्लू स्ट्रैग्लर' तारा, साथी तारे से खुराक लेकर कैसे हो रहा जवान, ये रहस्य भी खुला
Blue straggler star: पहली बार अंतरिक्ष में एक 'ब्लू स्ट्रैग्लर' तारा सक्रिय रूप से बनता हुआ दिखा है (फोटो- PIB)

Blue straggler star: भारतीय खगोलविदों ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक बेहद दुर्लभ खोज की है। पहली बार अंतरिक्ष में एक 'ब्लू स्ट्रैग्लर' (Blue Straggler Star - BSS) तारा सक्रिय रूप से बनता हुआ दिखा है। इस खोज ने खगोलविदों को इस बात का भी सबूत दिया है कि आखिर ये तारे बनते कैसे हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से करीब 9500 प्रकाश वर्ष दूर कोलेंडर 261 नाम के एक पुराने स्टार क्लस्टर में मौजूद बाइनरी स्टार सिस्टम TIC 327546480 की स्टडी करके यह सफलता हासिल की है।

साथी तारे से द्रव्यमान लेकर ऐसे जवान हो रहा 'ब्लू स्ट्रैग्लर'

ब्लू स्ट्रैग्लर तारे अपने क्लस्टर के दूसरे तारों की तुलना में अधिक गर्म, चमकीले और भारी होते हैं। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक यह बाइनरी सिस्टम सेमीडिटैच्ड स्थिति में है। इसका मतलब है कि इसमें से एक तारा इतना फैल गया है कि उसकी सामग्री उसकी गुरुत्वाकर्षण सीमा (रोश लोब / Roche Lobe) को पार कर रही है।

कम द्रव्यमान वाला साथी तारा लगातार अपने पदार्थ (मास) का ट्रांसफर ब्लू स्ट्रैग्लर तारे में कर रहा है। साथी तारे से मिल रही इस खुराक के कारण ही यह तारा फिर से जवान हो रहा है। वैज्ञानिकों को इस सिस्टम से मजबूत एक्स-रे उत्सर्जन का भी पता चला है। ये इस बात की पुष्टि करता है कि पदार्थ का ट्रांसफर वर्तमान में भी जारी है।

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