CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में सोमवार (27 जुलाई) को भारत को पैरा एथलेटिक्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। 40 साल की शर्मिला ने 9.81 मीटर के अपने सीजन के बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत के 20 साल के इंतजार को खत्म किया। इसी इवेंट में एक विवाद के बाद एक और भारतीय एथलीट शिल्पा शायला को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। शिल्पा ने 7.26 मीटर का अपना पर्सनल बेस्ट थ्रो किया था।
शुरुआत में नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति में थीं। लेकिन भारतीय दल की आपत्ति और आधिकारिक समीक्षा के बाद उनके एकमात्र वैध प्रयास को फाउल करार दिया गया। नतीजतन, चौथे स्थान पर रहीं शिल्पा शैला को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। हालांकि, नाइजीरिया के इस फैसले के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की संभावना है।
मेडल स्टैंडिंग में बदलाव की घोषणा के बाद भावुक शिल्पा ने शर्मिला के साथ जश्न मनाया। इस तरह, भारत ने इस इवेंट में दो मेडल जीते। F57 कैटेगरी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले अंगों में अक्षमता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत कम होती है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल है।
2 साल की उम्र में पोलियो ने बदल दी जिंदगी
शर्मिला धनखड़ का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता छोटे किसान थे। जबकि उनकी मां नेत्रहीन थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने किसी तरह जीवनयापन किया। महज दो साल की उम्र में शर्मिला पोलियो की शिकार हो गईं। गांव में समय पर इलाज न मिलने के कारण उनका बायां पैर हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
कम उम्र में शादी, दहेज प्रताड़ना और टूटा परिवार
शर्मिला की जिंदगी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई। लेकिन ससुराल में उन्हें दहेज की मांग को लेकर कथित तौर पर सालों तक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आखिरकार, करीब 25 साल की उम्र में उन्हें अपनी दो बेटियों के साथ ससुराल छोड़कर मायके लौटना पड़ा। बाद में उनकी शादी अजीत सिंह से हुई। परिवार के सहयोग और पति के समर्थन ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी। इसी दौरान उन्होंने खेलों में करियर बनाने का फैसला किया।
34 साल की उम्र में शुरू किया खेल करियर
जहां अधिकांश खिलाड़ी बचपन से ट्रेनिंग शुरू कर देते हैं। वहीं शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा। उन्होंने F57 वर्ग में शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में प्रतिस्पर्धा शुरू की और बहुत कम समय में देश की शीर्ष पैरा एथलीटों में अपनी अलग पहचान बना ली। साल 2021 की पैरा नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने अपने पहले ही टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतते हुए 7.40 मीटर के थ्रो के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
अब तक के प्रदर्शन पर एक नजर