बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को अमेजन रिटेल इंडिया के एक वेयरहाउस के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि नियम लागू करने के नाम पर एजेंसी “मच्छर को तलवार से मारने” जैसा कदम उठा रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए एफडीए की तारीफ की। हालांकि, कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ऐसे मामलों में किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को पूरी तरह बंद करना सही तरीका है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई मामले की गंभीरता के हिसाब से होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने एफडीए से कही ये बात
कोर्ट ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को कार्रवाई करते समय ज्यादा व्यवस्थित और संतुलित तरीका अपनाने की सलाह दी। मई में आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे के एफडीए कमिश्नर बनने के बाद से यह विभाग लगातार चर्चा में है। उनके कार्यभार संभालने के बाद विभाग ने कई खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की है, जिनमें कई मशहूर रेस्टोरेंट भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान बेंच ने एफडीए की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा, “नीति को सख्ती से लागू करने के चक्कर में आप मच्छर को तलवार से मारने की कोशिश कर रहे हैं।”
यह मामला अमेजन रिटेल इंडिया की याचिका के बाद कोर्ट पहुंचा। एफडीए ने भिवंडी में अमेजन के वेयरहाउस के खिलाफ कार्रवाई की थी। एजेंसी का आरोप था कि जिन खाद्य उत्पादों की एक्सपायरी हो चुकी थी और जिन्हें नष्ट किया जाना था, उन्हें दोबारा बाजार में भेजा जा रहा था। अमेजन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने कोर्ट को बताया कि एफडीए के अधिकारियों ने 24 जून को वेयरहाउस का निरीक्षण किया था। इसके अगले ही दिन अधिकारियों ने बिना कोई ‘सुधार नोटिस’ जारी किए वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
अपील के दौरान लाइसेंस रद्द करने पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अमेजन के वकील वेंकटेश धोंड ने आगे बताया कि कंपनी ने वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी। लेकिन अपील पर सुनवाई चल ही रही थी कि एफडीए ने 1 जुलाई को अमेजन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद एजेंसी ने वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने एफडीए की इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाया। जजों ने कहा, “जब मामला अपील में चल रहा था, तब लाइसेंस रद्द करने का आदेश कैसे दिया जा सकता है? कानून साफ है कि अपील की अवधि के दौरान इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती।” रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच ने एफडीए को यह भी याद दिलाया कि नियमों को लागू करते समय तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ कानूनी नियमों और प्रक्रिया का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा- नियमों का पालन करें
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई पर फिर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, “अपनी नीति को सख्ती से लागू करने के चक्कर में आप मच्छर को तलवार से मारने की कोशिश कर रहे हैं। तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।” एफडीए की ओर से सरकारी वकील नेहा भिड़े ने कोर्ट से अपना पक्ष रखने के लिए हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को करेगा।