₹10000 Crore Package for ATF: मिडिल ईस्ट में ईरान संकट के चलते आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज यानी 3 जून को ₹10000 करोड़ के विशेष पैकेज को मंजूरी दे दी है। युद्ध के बढ़ने की आशंका के बीच इस पैकेज से भारतीय विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी।
इसका मुख्य उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को संकट के समय वित्तीय सहायता देना है, ताकि वे भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को स्थिर कीमतों पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की सप्लाई कर सकें। ईरान युद्ध के कारण भारी दबाव झेल रही एयरलाइंस कंपनियों और महंगे हवाई सफर से परेशान आम यात्रियों के लिए इसे एक बड़ा बूस्टर डोज माना जा रहा है।
कैसे काम करेगा यह ₹10000 करोड़ का राहत पैकेज?
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से सरकारी तेल कंपनियों को ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में दी जाएगी।
जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की इंपोर्ट पैरिटी प्राइस तय बेंचमार्क से ऊपर जाएगी, तो तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई इस ₹10000 करोड़ के फंड से की जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हवाई ईंधन के दाम सामान्य या कम होंगे, तेल कंपनियों से यह अंतर-राशि वापस वसूल कर भारत के 'समेकित कोष' में जमा करा दी जाएगी। यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक पूरा फंड वसूल नहीं हो जाता।
आम जनता और एयरलाइंस को क्या होगा फायदा?
मिडिल ईस्ट संकट की वजह से हवाई ईंधन की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे कई बड़े फायदे होंगे:
सस्ता हो सकता है हवाई सफर: पिछले कुछ हफ्तों में ईंधन महंगा होने के कारण कई एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रूटों पर 'फ्यूल सरचार्ज' बढ़ा दिया था, जिससे टिकटें महंगी हो गई थीं। इस फैसले के बाद किराए में आ रहे इस उतार-चढ़ाव पर लगाम लगेगी।
बेहतर बिजनेस प्लानिंग: एटीएफ की कीमतों में स्थिरता आने से एयरलाइंस कंपनियां अपने ऑपरेशनल और फाइनेंशियल खर्चों की बेहतर प्लानिंग कर सकेंगी।
कनेक्टिविटी रहेगी बरकरार: इस संकट काल में भी देश-विदेश की हवाई सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेंगी।
क्रैक स्प्रेड को लेकर क्या थी एयरलाइंस की मांग?
हवाई ईंधन संकट के बीच विमानन कंपनियों ने सरकार से एटीएफ के प्राइसिंग मैकेनिज्म की समीक्षा करने की गुहार लगाई थी। एयरलाइंस चाहती थीं कि तेल कंपनियों के रिफाइनरी मार्जिन को सीमित करने के लिए 'क्रैक स्प्रेड बैंड' को दोबारा लागू किया जाए, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतों में समानता लाई जा सके।
यहां आपको बता दें कि कच्चे तेल को खरीदने की लागत और उससे बनने वाले रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों जैसे- पेट्रोल, डीजल, एटीएफ के बाजार मूल्य के बीच के अंतर को 'क्रैक स्प्रेड' कहा जाता है। यह रिफाइनरी कंपनियों के मुनाफे को मापने का एक पैमाना है।