कोयला लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए मिले ₹37500 करोड़, इस सेक्टर में 50 हजार नौकरियों के मौके बनेंगे, फुल डिटेल जानिए

Coal Gasification Ccheme: इस योजना के जरिए निजी और सरकारी क्षेत्र से करीब ₹2.5 से ₹3 लाख करोड़ का निवेश जुटाने का लक्ष्य है। योजना के पूरी तरह लागू होने पर सरकार को सालाना ₹6300 करोड़ का राजस्व मिलेगा, इसके अलावा GST से होने वाली कमाई अलग होगी

अपडेटेड May 13, 2026 पर 4:05 PM
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लगभग 25 प्रोजेक्ट्स के जरिए कोयला बेल्ट वाले इलाकों में 50 हजार युवाओं को काम मिलेगा

Coal Gasification Jobs: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने 'सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स' (Surface Coal/Lignite Gasification Projects) को बढ़ावा देने के लिए ₹37500 करोड़ की वित्तीय सहायता वाली योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना से न केवल भारत की विदेशों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में 50000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

भारत के पास दुनिया का विशाल कोयला भंडार लगभग 401 बिलियन टन है। इस योजना का लक्ष्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का है। इससे उन उत्पादों का देश में ही निर्माण होगा जिन्हें हम भारी मात्रा में इंपोर्ट करते हैं, ये रहा देश के कुछ महत्वपूर्ण इंपोर्ट का आंकड़ा:

  • LNG: 50% से ज्यादा आयात होता है।
  • यूरिया: करीब 20% आयात होता है।
  • मिथेनॉल: 80-90% तक आयात होता है।
  • अमोनिया: लगभग 100% आयात करना पड़ता है।


निवेश के साथ नौकरियों की बौछार

कैबिनेट के इस फैसले से देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक क्रांति आने की उम्मीद है। लगभग 25 प्रोजेक्ट्स के जरिए कोयला बेल्ट वाले इलाकों में 50 हजार युवाओं को काम मिलेगा। इस योजना के जरिए निजी और सरकारी क्षेत्र से करीब ₹2.5 से ₹3 लाख करोड़ का निवेश जुटाने का लक्ष्य है। योजना के पूरी तरह लागू होने पर सरकार को सालाना ₹6300 करोड़ का राजस्व मिलेगा, इसके अलावा GST से होने वाली कमाई अलग होगी।

योजना की ये है मुख्य बातें

सरकार ने इस सेक्टर में निवेश को आसान बनाने के लिए कई रियायतें दी हैं:

वित्तीय प्रोत्साहन: प्लांट और मशीनरी की लागत का 20% तक वित्तीय इंसेंटिव सरकार देगी।

कैपिंग: किसी एक प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम ₹5000 करोड़ और एक ग्रुप के लिए ₹12000 करोड़ तक की मदद मिलेगी।

30 साल का एग्रीमेंट: 'सिनगैस' उत्पादन के लिए कोयला लिंकेज की अवधि बढ़ाकर 30 साल कर दी गई है, जिससे कंपनियों को लंबे समय तक कच्चे माल की चिंता नहीं रहेगी।

पारदर्शी प्रक्रिया: प्रोजेक्ट्स का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए किया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

भारत ने वित्त वर्ष 2025 में LNG, यूरिया और मिथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर करीब ₹2.77 लाख करोड़ खर्च किए थे। मिडिल ईस्ट के मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए, भारत के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर होना अनिवार्य हो गया है। यह योजना 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

अब जानिए क्या होता है कोल गैसीफिकेशन?

आसान भाषा में समझें तो कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोयले को जलाने के बजाय उसे रासायनिक प्रक्रिया के जरिए 'सिंथेसिस गैस' या 'सिनगैस' (Syngas) में बदला जाता है। इस गैस का उपयोग बिजली बनाने के अलावा यूरिया, मिथेनॉल और अन्य केमिकल बनाने में किया जाता है, जो प्रदूषण भी कम फैलाता है। ऐसा करने से भारत के इंपोर्ट में भारी कमी होगी जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और रुपया भी मजबूत होगा।

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