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अब देश भर के स्कूलों में शुरू होगी सेक्स एजुकेशन, केन्द्र सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी

यह रिपोर्ट उस समय तैयार की गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसे उपायों पर विचार करे, जिनसे किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों और नाबालिग के गर्भवती होने के मामलों को पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत अपने-आप अपराध न माना जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jul 14, 2026 पर 9:45 AM
अब देश भर के स्कूलों में शुरू होगी सेक्स एजुकेशन, केन्द्र सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी
सेक्स एजुकेशन देश के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है।

सेक्स एजुकेशन देश के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर देशभर के सभी स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक सेक्स एजुकेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद इन सिफारिशों को लागू किया जाएगा। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार ने समिति की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कही ये बात

यह रिपोर्ट उस समय तैयार की गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसे उपायों पर विचार करे, जिनसे किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों और नाबालिग के गर्भवती होने के मामलों को पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत अपने-आप अपराध न माना जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया । इस समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह जांच करे कि पॉक्सो कानून का आपसी सहमति वाले किशोर रिश्तों पर क्या असर पड़ता है। साथ ही, यह भी देखा जाए कि बच्चों की सुरक्षा, उनकी निजता के अधिकार और कानून के प्रावधानों के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।

समिति ने क्या सिफारिशें की हैं?

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