भारत में शुरू होने जा रही है तेल की सबसे बड़ी खोज, सीधे खुदाई नहीं होगी; पहले होगा ये काम

India Energy Security: रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार भारत के पूर्वी तट पर हजारों किलोमीटर के दायरे में एक बड़े ऑफशोर यानी समुद्र के भीतर तेल और गैस खोज सर्वे की योजना पर काम कर रही है। यह सर्वे मुख्य रूप से पूर्णिया और महानदी बेसिन, कृष्णा गोदावरी बेसिन, कावेरी बेसिन और अंडमान बेसिन में चलाया जाएगा

अपडेटेड May 26, 2026 पर 11:32 AM
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दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान के तहत जमीन या समुद्र के नीचे सीधे खुदाई नहीं की जाएगी

Fresh Hunt For Oil And Gas Reserves In India: ग्लोबल संकट के दौर में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और विदेशों से महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक सरकार एक नई प्लानिंग पर काम कर रही है। इसके तहत देश के भीतर छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडारों का पता लगाने के लिए जल्द ही अब तक का सबसे बड़ा खोजी अभियान शुरू होने वाला है।

दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान के तहत जमीन या समुद्र के नीचे सीधे खुदाई नहीं की जाएगी। इसके बजाय, सरकार आधुनिक तकनीक और एडवांस कंप्यूटिंग की मदद से पहले एक खास वैज्ञानिक प्रक्रिया को अंजाम देगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तकनीकी शाखा, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान संभाल रहा है।

सीधे खुदाई क्यों नहीं? पहले डेटा का होगा 'एक्स-रे'


मंत्रालय द्वारा जारी किए गए सार्वजनिक नोटिस के मुताबिक, इस अभियान का पहला चरण पूरी तरह तकनीक और पुराने डेटा के पुनर्मूल्यांकन पर आधारित होगा। सरकार ने विशेषज्ञ कंपनियों को आमंत्रित किया है जो दशकों पुराने भूगर्भीय डेटा को आज के एडवांस इमेजिंग टूल्स की मदद से दोबारा प्रोसेस करेंगी। देश के विभिन्न सेडिमेंट्री बेसिनों में नए सिरे से अत्याधुनिक 3D सीस्मिक सर्वे किए जाएंगे।

आसान भाषा में समझे तो सीस्मिक सर्वे को आप जमीन का 'मेडिकल स्कैन' या 'अल्ट्रासाउंड' मान सकते हैं। इसमें ध्वनि तरंगों को जमीन के नीचे भेजा जाता है और वहां से टकराकर लौटने वाली तरंगों के आधार पर नीचे का नक्शा तैयार किया जाता है। इससे पता चलता है कि किस हिस्से में व्यावसायिक रूप से फायदेमंद कच्चा तेल या गैस मौजूद हो सकती है। पुरानी तकनीकों से जो हिस्से छूट गए थे, अब हाई-एंड कंप्यूटिंग से उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाया जाएगा।

ईस्ट कोस्ट से अंडमान तक मचेगा हलचल

सीएनएन-न्यूज18 के अमन शर्मा की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार भारत के पूर्वी तट पर हजारों किलोमीटर के दायरे में एक बड़े ऑफशोर यानी समुद्र के भीतर तेल और गैस खोज सर्वे की योजना पर काम कर रही है।

यह विशाल भूवैज्ञानिक सर्वे मुख्य रूप से पूर्णिया और महानदी बेसिन, कृष्णा गोदावरी बेसिन, कावेरी बेसिन और अंडमान बेसिन में चलाया जाएगा। सरकार चाहती है कि विशेषज्ञ कंपनियां समुद्र की गहराइयों की मैपिंग करें ताकि यह साफ हो सके कि वहां कितना हाइड्रोकार्बन छिपा है।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

भारत वर्तमान में अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी हिस्सा विदेशों से इंपोर्ट करके पूरा करता है। वैश्विक तनाव, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर हमेशा दबाव बना रहता है। यही वजह है कि नीति निर्माता घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इस बार आर-पार के मूड में हैं। यह कदम भले ही किसी नए तेल भंडार की खोज की घोषणा नहीं है, लेकिन यह भविष्य की बड़ी खोजों के लिए जमीन तैयार करने का काम जरूर करेगा।

1 जून से शुरू होगी बिडिंग प्रोसेस

इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जो भी विशेषज्ञ ऊर्जा-सर्वेक्षण कंपनियां इस काम में शामिल होना चाहती हैं, उनके लिए बिडिंग का दस्तावेज 1 जून से पब्लिक कर दिया जाएगा। इस कूटनीतिक दस्तावेज में काम के दायरे, सटीक लोकेशंस और अनुबंध की शर्तों की पूरी डिटेल होगी।

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