Ram Temple Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने सोमवार (29 जून) को 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान तीन घंटे से ज्यादा समय तक दर्ज किया। 'न्यूज 18' के मुताबिक पूछताछ के दौरान राय ने कथित घोटाले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मंदिर का चंदा संभालने वाले कर्मचारी ऐसा अपराध कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने मंदिर के चंदे के मैनेजमेंट में कथित अनियमितताओं को लेकर राय से विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने कहा कि कथित गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने हैरानी जताई कि ट्रस्ट के साथ काम करने वाले लोग ऐसे घोटाले में शामिल हो सकते हैं।
अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस
पुलिस ने चल रही जांच के तहत ट्रस्ट के सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी सवाल-जवाब के लिए नोटिस जारी किए हैं। इस बीच, ट्रस्ट ने अपनी बैठक 6 जुलाई को करने का फैसला किया है। इस बैठक में राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है।
यह मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में मिले चंदे में बड़े पैमाने पर गबन के आरोप लगे। इसके बाद FIR दर्ज की गई। राम भक्तों द्वारा दान किए गए कैश और कीमती सामान की गिनती में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव के तौर पर हुई है।
आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट के विशेष जज रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी।
आरोपियों को नहीं मिल रहे हैं वकील
अयोध्या में वकीलों ने सोमवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक में लिया गया।
सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
बैठक के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका शरण मिश्र ने पत्रकारों को बताया कि सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि एसोसिएशन का कोई भी वकील आरोपियों की ओर से पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा, "अगर कोई वकील फिर भी आरोपियों का मुकदमा लड़ना चाहता है, तो उसे पहले एक आवेदन देना होगा और प्रति आरोपी पांच लाख रुपये बार एसोसिएशन में योगदान के तौर पर जमा करने होंगे। इस राशि का इस्तेमाल एसोसिएशन मामले में मुकदमा चलाने के लिए करेगी।"