भारत के इस इलाके में मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल, 3 रुपये बढ़ने के बाद भी 90 रुपये लीटर से कम दाम
Petrol Diesel Price: हालिया 3 रुपये की बढ़ोतरी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव और ईरान-इजरायल संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों पर पड़ा है
Petrol Diesel: भारत के इस इलाके में मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल, ₹3 बढ़ने के बाद भी ₹90 लीटर भी नहीं पहुंचे दाम!
पश्चिम एशिया में संकट का असर अब धीरे-धीरे भारत की आम जनता पर भी पड़ने लगा है। 15 मई की सुबह ही सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की नई दरें जारी करते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। इससे पहले रसोई गैस के दाम भी बढ़ाए गए थे। हर तरफ इस बात की चर्चा है कि दम बढ़ने के बाद देश के किन राज्यों में पेट्रोल डीजल कितना महंगा हुआ, लेकिन हम आज आपको बताते हैं कि भारत के किस इलाके में पेट्रोल-डीजल सबसे ज्यादा सस्ता मिल रहा है। आप इतना समझ लीजिए कि 3 रुपये इस बढ़ोतरी के बाद भी यहां पेट्रोल और डीजल की कीमत 90 रुपये से भी कम है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
हालिया 3 रुपये की बढ़ोतरी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव और ईरान-इजरायल संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों पर पड़ा है।
कहां मिल रहा सबसे सस्ता तेल?
भारत में सबसे सस्ता तेल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मिल रहा है, जो हिंद महासागर में स्थित हैं। ये द्वीप पश्चिम में बंगाल की खाड़ी और पूर्व में अंडमान सागर के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करते हैं।
3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अंडमान की राजधानी श्री विजयपुरम (जिसे पहले पोर्ट ब्लेयर कहा जाता था) में पेट्रोल ~₹84.99 रुपये प्रति लीटर और डीजल ~₹80.64 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
इसके उलट, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में कीमतें सबसे ज्यादा हैं। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल की कीमत ₹113 के पार पहुंच गई है।
अंडमान निकोबार में पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों?
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पेट्रोल और डीजल के सबसे सस्ता होने के पीछे कोई एक जादुई कारण नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और टैक्स संरचना का एक गणित है।
1. वैट (Value Added Tax):
यह सबसे बड़ा कारण है। केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) लगाती है, लेकिन हर राज्य सरकार अपनी सुविधानुसार VAT वसूलती है। अंडमान निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में वैट बहुत कम है, जबकि आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह बहुत ज्यादा है।
जहां उत्तर प्रदेश, राजस्थान या आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में वैट की दरें 15% से 35% तक होती हैं, वहीं अंडमान और निकोबार में यह देश में सबसे कम यानी मात्र 1% के आसपास है। कम टैक्स का मतलब है कि बेस प्राइस (Base Price) में बहुत कम इजाफा होता है, जिससे जनता को यह काफी सस्ता मिलता है।
2. केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा
अंडमान और निकोबार एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में होता है। केंद्र सरकार यहां के विकास और सामरिक महत्व को देखते हुए स्थानीय टैक्स को न्यूनतम रखती है।
3. परिवहन लागत
तेल रिफाइनरी से पेट्रोल पंप की दूरी भी कीमत तय करती है। जो इलाके रिफाइनरी या बंदरगाहों के करीब हैं, वहां परिवहन खर्च कम होने के कारण तेल थोड़ा सस्ता होता है। वहीं पहाड़ी या दूर-दराज के इलाकों में ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है।
आमतौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां जैसे IOCL (Indian Oil Corporation Limited) हल्दिया (पश्चिम बंगाल), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) या चेन्नई (तमिलनाडु) की रिफाइनरियों से तेल को पोर्ट ब्लेयर तक पहुंचाती हैं। वहां इन्हें बड़े स्टोरेज टैंकों में जमा किया जाता है।
अंडमान में तेल पूरी तरह से भारत की मुख्य भूमि से आयात होता है, फिर भी वहां का वैट (VAT) मात्र 1% होने की वजह से पूरे देश के मुकाबले सबसे सस्ता तेल मिलता है।
4. भौगोलिक और सामाजिक कारण
महंगाई पर नियंत्रण: द्वीप समूह होने के कारण यहां ज्यादातर सामान बाहर से समुद्री जहाज के जरिए आता है। अगर यहां तेल महंगा होगा, तो परिवहन खर्च बढ़ने से हर छोटी-बड़ी चीज (सब्जी, राशन, निर्माण सामग्री) बहुत महंगी हो जाएगी। इसलिए जनता को राहत देने के लिए तेल सस्ता रखा जाता है।
मछुआरों को राहत: यहां की एक बड़ी आबादी मछली पकड़ने के व्यवसाय पर निर्भर है, जिसमें नावों के लिए डीजल का उपयोग भारी मात्रा में होता है। सस्ता ईंधन उनके जीवनयापन के लिए बेहद जरूरी है।