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चीन हो या पाकिस्तान... अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा '100 किमी की चक्रव्यूह' दीवार

जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने लगभग 52,000 करोड़ रुपये के मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है। महंगी फाइटर जेट, युद्धपोत या लंबी दूरी की मिसाइल सिस्टम पर केंद्रित पिछली खरीद के उलट इस बार उन हथियारों पर ध्यान दिया गया है जिनका इस्तेमाल भविष्य के संघर्ष के शुरुआती घंटों में होने की संभावना है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jul 05, 2026 पर 8:28 AM
चीन हो या पाकिस्तान... अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा '100 किमी की चक्रव्यूह' दीवार
उन हथियारों पर ध्यान दिया गया है जिनका इस्तेमाल भविष्य के संघर्ष के शुरुआती घंटों में होने की संभावना है

भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।

भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

'ऑपरेशन सिंदूर' से मिला बड़ा सबक

कुछ महीने पहले हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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