भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियों को लेकर देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने एक जरूरी बात कही है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की वजह से भले ही भारत का तात्कालिक ध्यान अपनी पश्चिमी सीमाओं पर रहता हो, लेकिन लॉन्ग टर्म के नजरिए से चीन ही भारत का असली प्रतिस्पर्धी है। आपको बता दें कि जनरल नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना प्रमुख के पद पर रहे थे। जनरल नरवणे ने साफ कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों से मिलने वाली चुनौतियां पूरी तरह से अलग हैं। उन्होंने सीमाओं पर मजबूत मिलिटरी डिटरेंस बनाए रखने के साथ-साथ लंबे समय से चले आ रहे विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया।
अपनी किताब के विमोचन पर पूर्व आर्मी नरवणे ने और क्या क्या कहा?
पूर्व सेना प्रमुख अपनी नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ (The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries) के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। ये किताब रूपा पब्लिकेशंस से आई है। भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से मिलने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से अलग मामले हैं। हमने दोनों देशों के साथ युद्ध लड़े हैं और हमारी सीमाएं अनसुलझी हैं। इसलिए वे हमेशा एक खतरे और चुनौती के रूप में हमारे रडार पर रहेंगे।
जनरल नरवणे ने दोनों देशों से मिलने वाली चुनौतियों के अंतर को समझाते हुए कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं और उनके द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के कारण हमारा ध्यान हमारी पश्चिमी सीमाओं की ओर रहता है। लेकिन मुझे लगता है कि ये बहुत साफ है कि लंबी अवधि में और आने वाले वर्षों में चीन हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी होने जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि मैंने जानबूझकर प्रतिस्पर्धी शब्द का इस्तेमाल किया है, न कि दुश्मन शब्द का। पूर्व सेना प्रमुख के मुताबिक चीन सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में भारत का बड़ा प्रतिस्पर्धी होगा। उन्होंने कहा कि जहां भी प्रतिस्पर्धा होती है, वहां थोड़ा बहुत संघर्ष हमेशा होता है।
भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति के अनुरूप जनरल नरवणे ने मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर ही जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन संघर्षों और मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत का इस्तेमाल करें, फोर्स का इस्तेमाल हमेशा अंतिम प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए सैन्य रूप से पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ऐसा क्षण आता है जब आपको यह अहसास होता है कि सिर्फ बातचीत से बात नहीं बनने वाली तो ऐसे में आपके पास एक मजबूर मिलिट्री डिटरेंस होना चाहिए।
पड़ोसियों से संबंधों पर क्या बोले पूर्व सेना प्रमुख?
भारतीय सेना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सेना हर समय पूरी तरह से तैयार रहती है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आप अपने पड़ोसियों को नहीं चुन सकते चाहे वह वास्तविक जीवन हो या भू-राजनीति। आपके पास जो भी है, आपको उसी में सबसे बेहतर रास्ता निकालना होता है।