होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ये 7 चीजें हो जाएंगी महंगी! आम जनता की जेब पर कितना होगा असर
Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इसका असर भारतीय घरों पर भी साफ-साफ देखने को मिलेगा। इससे आम जरूरत की चीजे महंगी हो सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ये 7 चीजें हो जाएंगी महंगी!
Strait of Hormuz: ईरान ने बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा करते हुए चेतावनी दी है कि अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से कोई भी जहाज गुजरा तो उस पर हमला किया जाएगा। गुरुवार को यह जानकारी ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम एनर्जी रूट में से एक है, जहां से दुनिया भर में कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है। इस समुद्री रास्ते में लंबे समय तक रुकावट आने से एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि, भारत के लिए यह मामला बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है, और इसमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र (Gulf region) से आता है। साथ ही, भारत के LPG आयात का भी एक बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर ही गुजरता है।
आपको बताते चलें कि जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, इसका असर सिर्फ पेट्रोल डीजल तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय घरों पर भी पड़ेगा। इससे आम जरूरत की चीजे महंगी हो सकती हैं।
अब आइए जानते हैं, अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो रोजाना की कौन सी 7 जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं:
LPG सिलेंडर
ऊर्जा की बढ़ती लागत से सबसे पहले प्रभावित होने वाली चीज़ों में कुकिंग गैस (LPG) शामिल हो सकती है। चूंकि भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए आयात का बिल बढ़ने से घरेलू कीमतों और सब्सिडी की गणना पर असर पड़ सकता है।
पेट्रोल और डीजल
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ईंधन को रिफाइन करने और आयात करने की लागत बढ़ जाती है। भले ही खुदरा कीमतें तुरंत न बढ़ें, लेकिन वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से तेल मार्केटिंग कंपनियों और सरकारी खजाने पर दबाव पड़ सकता है।
सब्जियां, दूध और रोजाना का राशन
अधिकतर खाद्य पदार्थ एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट होकर पहुंचते हैं। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, जिसका असर सब्जियों, फलों, दूध और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ता है।
पैक्ड फूड
बिस्कुट, चिप्स, खाने का तेल, इंस्टेंट नूडल्स और अन्य पैक्ड सामान पर भी असर पड़ सकता है। इनकी कीमतें इसलिए बढ़ सकती हैं क्योंकि ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग दोनों की लागत बढ़ जाती है, जिनमें से कई पेट्रोलियम से जुड़े होते हैं।
साबुन और डिटर्जेंट
घर की सफाई के कई प्रोडक्ट्स पेट्रोकेमिकल से बने इंग्रीडिएंट्स पर निर्भर करते हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे रिटेल कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
प्लास्टिक के घरेलू सामान
बाल्टी, कंटेनर, पानी की बोतलें, स्टोरेज बॉक्स और किचन के सामान पेट्रोलियम से बने रॉ मटीरियल पर बहुत ज्यादा निर्भर करते हैं। ऐसे में पेट्रोकेमिकल्स महंगे होने पर इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स
गैजेट्स पर इसका असर तुरंत न दिखे, लेकिन यह काफी अहम हो सकता है। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ने और रॉ मटीरियल की कीमतें बढ़ने से धीरे-धीरे इम्पोर्ट किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स और अप्लायंसेज की लागत बढ़ सकती है।
भारत पर क्यों है खतरा?
भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने एनर्जी सोर्स में विविधता लाई है और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी बनाए रखे हैं। जरूरत पड़ने पर वह रूस, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे सप्लायर्स से अतिरिक्त कच्चा तेल भी खरीद सकता है।
हालांकि, अगर तनाव बना रहता है और तेल की कीमतें हफ्तों या महीनों तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे ग्राहकों के लिए ईंधन, कुकिंग गैस, किराने का सामान और घर की कई चीजें महंगी हो सकती हैं।