पहले दिखीं दरारें, फिर भरभराकर गिरी बिल्डिंग...सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने गिनाईं सुरक्षा की खामियां

Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने के बाद, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने निर्माण और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अब वहां हुए अनधिकृत निर्माण, अतिरिक्त मंजिलों और पास की इमारत की सुरक्षा की जांच की जा रही है।

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 9:28 AM
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पहले दिखीं दरारें, फिर भरभराकर गिरी बिल्डिंग... सत्यानिकेतन हादसे में 6 की मौत

Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने के बाद, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने निर्माण और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अब वहां हुए अनधिकृत निर्माण, अतिरिक्त मंजिलों और पास की इमारत की सुरक्षा की जांच की जा रही है। MCD की जानकारी के अनुसार, गिरी हुई इमारत सत्य निकेतन की P-14 थी, जो एक पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी और लगभग 55 वर्ग गज में फैली हुई थी।

इस इमारत में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और चौथी मंजिल तक के फ्लोर थे, और माना जाता है कि इसका निर्माण 1990 के दशक में हुआ था।

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि लगभग 30 साल पुरानी यह इमारत ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिल (G+4) की थी, जबकि रीसेटलमेंट कॉलोनी में पहले सिर्फ ग्राउंड फ्लोर के अलावा एक मंजिल (G+1) बनाने की ही इजाजत थी।


इस इमारत में लड़कों का हॉस्टल था और इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए पेइंग-गेस्ट अकोमोडेशन के तौर पर किया जाता था।

वहीं, इमारत के गिरने की घटना ने इसकी बनावट की हालत और कथित तौर पर बिना मंजूरी के किए गए निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इमारत में पहले ही दरारे देखी गई थी

खबरों के मुताबिक, गिरने से पहले ही इमारत में साफ दरारें आ गई थीं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या चेतावनी के संकेत देखे गए थे और क्या सही कदम उठाए गए थे।

बताया जा रहा है कि बेसमेंट और ग्राउंड-फ्लोर वाले हिस्सों में मरम्मत का काम भी चल रहा था।

वहीं, जांच कर रहे अधिकारी यह पता लगा रहे थे कि क्या इस काम के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी और क्या मरम्मत के काम से पहले या उसके दौरान सही स्ट्रक्चरल और सुरक्षा जांच की गई थी।

इसके अलावा, सुरक्षा से जुड़ी एक और अहम बात जिसकी जांच की जा रही है, वह है छात्रों के रहने वाली इस इमारत में सही इमरजेंसी एग्जिट का न होना।

इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि इमारत में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बुनियादी इंतजाम और पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद थे या नहीं।

MCD के पास बुकिंग या सीलिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं

हालांकि, MCD ने कहा कि प्रॉपर्टी की बुकिंग या सीलिंग का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, और न ही प्रॉपर्टी पर किए गए किसी काम के बारे में कोई शिकायत मिली है।

MCD ने जारी किया नोटिस

साथ ही, बगल की पांच-मंजिला इमारत को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जिसे कथित तौर पर दुकान नंबर 13 और 14 को मिलाकर बनाया गया था। एहतियात के तौर पर इस इमारत को खाली करा लिया गया है और MCD ने सुरक्षा के गंभीर खतरों को लेकर चेतावनी वाला नोटिस जारी किया है।

नगर निकाय के नोटिस में कहा गया है कि नई दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग/घर नंबर 13 की इमारत जर्जर और खतरनाक हालत में थी। इससे वहां रहने वाले, उसका इस्तेमाल करने वाले या वहां से गुजरने वाले लोगों के साथ-साथ आस-पड़ोस के लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो गया था।

इसलिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए, MCD ने आदेश मिलने के तीन दिन के भीतर प्रॉपर्टी को गिराने का आदेश दिया है।

खबरों के मुताबिक, बगल वाली इमारत पुराने निर्माण तरीके से बनाई गई है, जिसमें कोई सपोर्ट पिलर नहीं है और ईंट की दीवारें सीधे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अधिकारियों ने चिंता जताई कि यह कभी भी गिर सकती है। इसे मजबूती देने और स्थिर रखने के लिए सपोर्ट सिस्टम लगाया जा रहा है।

मलबा हटाने से बगल वाली इमारत पर पडे़गा असर

यह भी चिंता है कि गिरी हुई इमारत का मलबा हटाने से आधार कमजोर हो सकता है और बगल वाली इमारत की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। इसलिए, बचाव और स्थिरता लाने का काम जारी रहने के दौरान सुरक्षा के तौर पर आस-पास रहने वाले लोगों को भी वहां से हटा दिया गया है।

इस घटना के बाद बिल्डिंग से जुड़े सुरक्षा नियमों के पालन पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच करने वाले अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बिल्डिंग के स्ट्रक्चर और सुरक्षा की ठीक से जांच की गई थी, किसे बिल्डिंग की बनावट में गड़बड़ी के बारे में पता था, क्यों कोई कार्रवाई नहीं की गई और क्या नियमों को लागू करने में कोई चूक हुई थी।

स्थानीय लोगों ने दी जानकारी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले करीब 15 साल में इस रीसेटलमेंट कॉलोनी में इस तरह की यह चौथी घटना है। साल 2022 में हुई एक ऐसी ही घटना में दो लोगों की जान चली गई थी। बार-बार हो रहे इन हादसों ने इलाके की इमारतों की हालत और सुरक्षा नियमों को लागू करने की व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, MCD ने चार मंजिल से ज्यादा वाली अवैध इमारतों को तुरंत सील करने का आदेश दिया है। साथ ही, ऐसे निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि ऐसे निर्माणों के मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उन्हें तुरंत नौकरी से निकालना भी शामिल है।

दिल्ली में गिरी इमारत

पुलिस के मुताबिक, यह घटना दोपहर करीब 1.30 बजे हुई।

हादसे के बाद रातभर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका थी। इनमें ज्यादातर छात्र बताए जा रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। वहीं, 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और व्यक्ति को मलबे से निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।

बता दें कि पुलिस ने साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

सीएम रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को हादसे की वजह और इससे जुड़े पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

अब जांच में इमारत की बनावट की स्थिति, कथित अवैध निर्माण और मरम्मत कार्य, छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही के सवाल पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। खास तौर पर यह पता लगाया जाएगा कि किन लोगों को बताई गई समस्याओं के बारे में जानकारी थी और कथित तौर पर बचाव के उपाय क्यों नहीं किए गए।

वहीं, इस घटना के बाद ABVP सदस्यों ने MCD मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और छात्रों के इलाके में PG आवासों में सुरक्षा नियमों के पालन में कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया।

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