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Cyclone Murasu Updates: 'अर्नब' के बाद आंध्र में एक और चक्रवाती तूफान 'मुरासु' का खतरा! 3 नवंबर को लैंडफॉल की आशंका, 120 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

Cyclone Murasu Updates: बंगाल की खाड़ी में बने निम्न डिप्रेशन के चक्रवाती तूफान 'मुरासु' में तब्दील होने की आशंका है। यह तूफान तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात 'अर्नब' ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दस्तक दी थी। उस समय तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Nov 01, 2026 पर 11:50 AM
Cyclone Murasu Updates: 'अर्नब' के बाद आंध्र में एक और चक्रवाती तूफान 'मुरासु' का खतरा! 3 नवंबर को लैंडफॉल की आशंका, 120 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
Cyclone Murasu Updates: बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है

Cyclone Murasu Latest Update: चक्रवात 'अर्नब' के असर से अभी आंध्र प्रदेश के कई इलाके पूरी तरह उबर भी नहीं पाए हैं कि बंगाल की खाड़ी में एक और शक्तिशाली तूफान 'मुरासु' बनने का खतरा मंडराने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना दबाव का क्षेत्र गहरे दबाव (Deep Depression) में बदल चुका है। इसके 1 नवंबर की रात तक चक्रवाती तूफान और 2 नवंबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच दस्तक दे सकता है।

इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। इसके प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दस्तक दी थी। उस समय तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

कब देगा दस्तक?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, "संभावित चक्रवाती तूफान में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। इस दौरान हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यह मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है।" आईएमडी ने बुलेटिन में कहा है कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा अंडमान सागर के ऊपर बना अवदाब का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा और 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर उसी क्षेत्र में दबाव में बदल गया।

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