Delhi Blast Case: दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से जुड़े संभावित आतंकी लिंक का पता लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने दो मौलवी को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक हल्द्वानी की एक मस्जिद से और दूसरा नैनीताल से है। ये दोनों मूल रूप से रामपुर जिले के निवासी हैं। दिल्ली धमाके में इन दोनों की संदिग्ध भूमिका की बात सामने आ रही है।
फिदायीन आतंकी के फोन से मिली अहम जानकारी
NIA की यह कार्रवाई फिदायीन आतंकी डॉ. उमर नबी के मोबाइल फोन से मिली महत्वपूर्ण जानकारी के आधार पर की गई है। कॉल रिकॉर्ड्स की समीक्षा से जांचकर्ताओं को रामपुर में संभावित सहयोगियों की ओर संकेत मिला, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने टांडा, ददियाल और शाहबाद सहित कई स्थानों पर निगरानी शुरू कर दी। NIA की टीमें पिछले तीन दिनों से जिले भर में डेरा डाले हुए हैं और संदिग्ध आतंकी लिंक की जांच कर रही हैं।
2 मौलवियों की हुई गिरफ्तारी
शुक्रवार रात, NIA ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित बिलाल मस्जिद के मौलवी मोहम्मद आसिम कासमी को गिरफ्तार किया। एजेंसी नैनीताल की एक मस्जिद के मौलाना नईम से भी पूछताछ कर रही है। ये दोनों मौलवी मूल रूप से रामपुर के ददियाल गांव के रहने वाले हैं। मोहम्मद आसिम के परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह करीब 15 साल पहले हल्द्वानी चले गए थे और इस साल जनवरी में ददियाल आए थे। उनका परिवार मुख्य रूप से मदरसों में पढ़ाता है। उनके बड़े भाई, कासमी, कुंदरकी के मदरसे में पढ़ाते हैं, तीसरे भाई सलीम हसनकमाजरा मस्वासी के मदरसे में काम करते हैं, जबकि सबसे छोटे भाई नाजिम ददियाल में पढ़ाते हैं और इमाम के रूप में भी काम करते हैं।
पूर्व में कई साजिशों से जुड़ा है रामपुर का नाम
रामपुर की टांडा तहसील पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जांचों के कारण सुर्खियों में रही है। मई 2025 में, टांडा के आजादनगर के शहजाद को कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद NIA ने टांडा स्थित उसके आवास पर छापा मारा था। उसकी जमानत याचिका कई बार खारिज हो चुकी है। ऐसे ही साल 2021 में भी यह तहसील सुर्खियों में थी, जब गुजरात पुलिस ने वडोदरा में दर्ज जबरन धर्मांतरण के आरोपों को लेकर राहुपुरा के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। यूपी एटीएस ने भी इस साल जून में उससे पूछताछ की थी, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया था।