Delhi Building Collapse: ₹32 हजार किराया, फिर भी मालिक का पता नहीं! दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच रह रहे थे छात्र
Delhi Building Collapse: 'अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें...' राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में अपने 21 वर्षीय बेटे अर्पित जाज को खोने के बाद उसे अंतिम विदाई देने वाले देवास के भूपेंद्र जाज ने मंगलवार (8 सितंबर) को दोनों हाथ जोड़कर अभिभावकों से यह भावुक अपील की
Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच छात्र रह रहे थे
Delhi Building Collapse: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत के ढहने से 7 छात्रों की मौत और 5 लोगों के घायल होने के बाद इलाके में चल रहे PG और किराए के मकानों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां रहने वाले कई छात्रों का कहना है कि वे हजारों रुपये किराया देने के बावजूद अपने मकान मालिक तक को नहीं जानते। ज्यादातर मामलों में छात्रों का संपर्क सीधे मालिक से नहीं, बल्कि ब्रोकर या बिचौलियों से होता है। छात्रों के मुताबिक, मकान मालिक सामने नहीं आते और किसी समस्या की स्थिति में ब्रोकर ही उनका एकमात्र सहारा होता है। इसके चलते कई बार खराब रखरखाव, पानी की समस्या और जर्जर इमारतों जैसी शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
'टूटी दीवारें थीं, सीढ़ियां भी खराब थीं'
सत्य निकेतन की जिस इमारत के गिरने से सात लोगों की जान गई, उसमें पहले रह चुके यशवंत वेमानंद रेड्डी रेड्डम ने 'CNN न्यूज 18' को बताया कि वह 2024 में इस इमारत में रहते थे। बाद में जब वहां मरम्मत का काम शुरू होना था, तो उन्होंने कमरा खाली कर दिया। उन्होंने बताया कि इमारत के ऊपर की मंजिल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में थी। लेकिन नीचे की कई मंजिलें काफी पुरानी थीं। वहां रहना बेहद मुश्किल था। दीवारें टूटी हुई थीं। संकरी सीढ़ियों का रखरखाव ठीक से नहीं होता था। पूरी इमारत की हालत खराब थी।
सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि इमारत का असली मालिक कौन है। वे सिर्फ उन बिचौलियों को जानते थे, जिनके जरिए उन्हें रहने की जगह मिली थी। रेड्डी के मुताबिक, इमारत के कुछ हिस्से पहले से ही खराब थे। बाद में मरम्मत के बाद किराया बढ़ा दिया गया। फिर आखिरकार इमारत ढह गई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई।
एक बेड का किराया ₹16 हजार, दो बेड के लिए ₹32 हजार
इमारत में रहने वाले एक अन्य छात्र हबीब हादसे के वक्त वहां मौजूद नहीं थे। इसलिए उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया कि इमारत को बाहर से इतना अच्छी तरह पेंट किया गया था कि उसकी वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल था। उन्होंने बताया कि एक बेड का किराया करीब ₹16,000 था। दो बेड के लिए कुल किराया ₹32,000 देना पड़ता था। इसके बावजूद उन्हें मकान मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनका संपर्क सिर्फ एक तीसरे पक्ष से था, जो रहने से जुड़ी समस्याओं को देखता था। हबीब ने यह भी बताया कि इमारत में पानी की सप्लाई एक बड़ी समस्या थी।
'मालिक का नंबर तक नहीं होता'
सत्य निकेतन में रहने वाली छात्रा निराली ने बताया कि इलाके में मकान मालिकों से सीधे संपर्क न होना आम बात है। उनके मुताबिक, कई मकान मालिक इलाके में रहते ही नहीं हैं। किरायेदारों के पास उनका फोन नंबर तक नहीं होता। उन्होंने बताया कि जिस फ्लैट में वह फिलहाल रह रही हैं। वहां भी उनके पास मालिक का नंबर नहीं है। उनके पास सिर्फ ब्रोकर का नंबर है और किसी भी परेशानी की स्थिति में उन्हें उसी से संपर्क करना पड़ता है। निराली ने कहा कि सत्य निकेतन में यह स्थिति काफी आम है और ज्यादातर छात्र अपने मकान मालिक के बजाय ब्रोकर को ही जानते हैं।
₹15 हजार प्रति बेड तक पहुंचा PG का किराया
छात्रा ने बताया कि इलाके में PG का किराया काफी महंगा है। कुछ PG में एक बेड के लिए औसतन ₹15,000 प्रति माह तक लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब छात्रों से इतनी बड़ी रकम किराए के तौर पर ली जा रही है, तो उनकी सुरक्षा, इमारत के रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
'अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें...'
"अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें...:" राष्ट्रीय राजधानी के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में अपने 21 वर्षीय बेटे अर्पित जाज को खोने के बाद उसे अंतिम विदाई देने वाले देवास के भूपेंद्र जाज ने मंगलवार को दोनों हाथ जोड़कर अभिभावकों से यह भावुक अपील की। भूपेंद्र की आवाज में नौजवान बेटे को खोने का दर्द और दूसरे परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाने की चिंता साफ झलक रही थी। दिल्ली के एक महाविद्यालय के बीकॉम सेकंड ईयर के छात्र अर्पित की अंतिम यात्रा में उनके परिजन के साथ ही दोस्तों, शिक्षकों और पड़ोसियों की आंखें नम थीं।
बेटे को अंतिम विदाई देने के बाद भूपेंद्र ने पत्रकारों से कहा, "मैं सभी माता-पिता से बस यही कहना चाहूंगा कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें। मैं हताश हो गया हूं। मैं कई कठिनाइयों से जूझते हुए अर्पित को पढ़ा रहा था।" उन्होंने बताया कि अर्पित की एक आंख हादसे में खराब हो गई थी।परिवार ने उसकी दूसरी आंख दान करने का फैसला किया है, ताकि किसी जरूरतमंद मरीज की जिंदगी रोशन हो सके।
देवास में टैक्सी के कारोबार से जुड़े भूपेंद्र ने कहा कि हादसे के बाद बेटे की तलाश में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिल्ली के प्रशासन से उन्हें जरूरी मदद नहीं मिली। भूपेंद्र ने मांग की है कि हादसे की विस्तृत जांच कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रशासन को घटनास्थल के आसपास की जर्जर इमारतों पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
'अर्पित हमारे परिवार का चिराग था'
अर्पित के दादा माखनलाल जाज ने रुंधे गले से कहा, "वह (अर्पित) हमारे परिवार का चिराग था। हमसे हमारा सहारा छिन गया।" परिजन के मुताबिक, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी का त्योहार मनाने के बाद अर्पित पांच सितंबर को गृहनगर देवास से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे और छह सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इसके कुछ ही घंटों बाद सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना हुई, जिसमें अर्पित की मौत हो गई। परिजन के अनुसार, हादसे के बाद उनका अर्पित से संपर्क टूट गया। उन्होंने बताया कि सात सितंबर को अर्पित के शव की शिनाख्त हुई, जिसके बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए देवास ले आया गया।
रविवार को करीब 1.30 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन स्थित पांच मंजिला एक इमारत के गिर जाने से सात छात्रों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। घटनास्थल पर 27 घंटे से अधिक समय तक चला राहत एवं बचाव अभियान सोमवार को समाप्त हुआ। हादसे के संबंध में इमारत के मालिक, उसकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही पांच एमसीडी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।