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'लोगों की मदद नहीं चाहिए...', मालवीय नगर हादसे में मसीहा बने रियाजुद्दीन मंसूरी ने क्यों कही ये बात

Riyazuddin Mansuri : रियाजुद्दीन जब घटनास्थल पर पहुंचे, तब उनके साथ गांव के 7-8 युवक भी थे। गेस्ट हाउस के अंदर फंसे लोग चीख-चिल्ला रहे थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। हालात को देखते हुए उन्होंने अपनी दुकान से रजाइयां और गद्दे निकालकर सड़क पर बिछा दिए। इसके बाद ऊपर फंसे लोगों से नीचे कूदने को कहा। पहले 7-8 लोग और फिर 12 से 15 अन्य लोग नीचे कूदे

Rajat Kumarअपडेटेड Jun 08, 2026 पर 4:12 PM
'लोगों की मदद नहीं चाहिए...', मालवीय नगर हादसे में मसीहा बने रियाजुद्दीन मंसूरी ने क्यों कही ये बात
दिल्ली का मालवीय नगर, तीन जून 2026 को कभी ना भूलने वाले एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना।

दिल्ली का मालवीय नगर तीन जून 2026 को कभी ना भूलने वाले एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना। मालवीय नगर के हौजरानी में मौजूद फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में तीन जून को लगी आग में 22 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इस हादसे में 11 भारतीय और 11 विदेशी नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। होटल में लगी आग के बाद स्थिति इतनी भयावह थी कि, इस छह मंजिला इमारत में फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे कूदने लगे थे।

मौत के बीच उम्मीद की कहानी

वहीं मालवीय नगर हादसे के दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें रोड पर बिछे गद्दों पर कूदकर करीब 12 से 15 लोगों ने अपनी जान बचाई। यह सूझबूझ का काम होटल के ठीक सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाज़ुद्दीन और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने किया था। उन्होंने न केवल घायलों को बाहर निकालने में मदद की, बल्कि कई लोगों को अस्पताल भिजवाने के लिए चादरें और जरूरी कपड़े दिए। हालांकि लोगों की जान बचाने में रियाजुद्दीन अंसारी को नुकसान भी उठाना पड़ा है। रियाजुद्दीन अंसारी ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए उस हादसे के भयावह मंजर के बारे में हमें हर एक बात बताई।

रियाजुद्दीन मंसूरी ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत की।

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