Delhi Malviya Nagar Fire : दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार की सुबह एक होटल में लगी आग में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 11 विदेशी नागरिक हैं। होटल के पास दुकान चलाने वाले कुछ लोगों की सूझबूझ से कई लोगों की जानें बचाई जा सकीं। रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी दुकान खाली कर दी, ताकि आग से बचने के लिए होटल से कूदने वाले लोग सुरक्षित नीचे उतर सकें। जान बचाने की इस कोशिश में उनकी दुकान को काफी नुकसान हुआ।
रियाजुद्दीन मंसूरी का कहना है कि इस दौरान उन्हें 2 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अब रियाजुद्दीन मंसूरी सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी परवाह किए बिना लोगों की जान बचाने में मदद की, इसलिए उनके नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए।
रियाजुद्दीन मंसूरी इस हादसे में मदद करने वाले अकेले व्यक्ति नहीं थे। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के अनुसार, आमिर खान, मोहम्मद शोएब, वसीम राजा और मोहम्मद अफजल समेत कई स्थानीय लोगों ने भी सरकारी सहायता पहुंचने से पहले मौके पर पहुंचकर लोगों को बचाने में मदद की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना को लेकर लिखा गया, "मदद पहुंचने से पहले इंसानियत पहुंच गई थी।"
रियाजुद्दीन मंसूरी का कहना है कि होटल मालिकों ने कारोबार से मुनाफा कमाया, लेकिन कथित लापरवाही के कारण आग लगने का खामियाजा आसपास के लोगों को भुगतना पड़ा। इसी वजह से वे अपने नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हादसे के दौरान होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग नीचे खड़े लोगों से पूछ रहे थे कि क्या उन्हें जान बचाने के लिए कूद जाना चाहिए। ऐसे में मंसूरी के बेटे अरमान ने तुरंत अपनी दुकान से 20 से 25 गद्दे और रजाइयां निकालकर सड़क पर बिछा दीं। इन गद्दों की मदद से करीब आठ लोगों ने ऊपर से छलांग लगाई और उनकी जान बच गई। इतना ही नहीं, दुकान में रखी चादरों का इस्तेमाल घायलों और मृतकों को बाहर निकालने के लिए भी किया गया। स्थानीय लोगों की इस बहादुरी और तत्परता ने कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हादसे के दौरान कई स्थानीय लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग में फंसे लोगों की मदद की। आमिर खान, मोहम्मद शोएब, वसीम राजा और मोहम्मद अफजल की खास तौर पर सराहना की जा रही है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा गया कि "जब व्यवस्था नाकाम साबित हुई, तब ये लोग मदद के लिए सबसे पहले मौके पर पहुंचे।" प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसपास रहने वाले लोगों ने मिलकर बचाव कार्य में हिस्सा लिया। कुछ लोगों ने अपने घरों से तकिए और अन्य सामान लाकर सड़क पर रखा, ताकि इमारत से कूदने वाले लोगों को कम चोट लगे। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की वजह से कई लोगों की जान बचाई जा सकी। इस घटना ने दिखाया कि मुश्किल समय में आम लोग भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
मुआवजे की मांग क्यों कर रहे हैं रियाजुद्दीन मंसूरी?
रियाजुद्दीन मंसूरी ने सरकार से 2 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि आग लगने के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी दुकान का सामान इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य में मदद करने वाले लोगों को किसी और की कथित लापरवाही की कीमत नहीं चुकानी चाहिए। उनका कहना है कि उन्होंने इंसानियत के नाते लोगों की जान बचाने की कोशिश की, इसलिए उनके नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को प्रोत्साहन और सहयोग मिलना चाहिए जो आपात स्थिति में आगे बढ़कर दूसरों की मदद करते हैं।
हादसे में 21 लोगों की हुई मौत
3 जून की सुबह दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की जान चली गई। मृतकों में 9 भारतीय और 12 विदेशी नागरिक शामिल थे। आग लगने के बाद धुआं और लपटें तेजी से पूरी इमारत में फैल गईं, जिससे होटल में ठहरे कई लोग अंदर ही फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ लोगों ने कमरों की खिड़कियां तोड़ दीं और बाहर खड़े लोगों से मदद की गुहार लगाने लगे। हालात इतने गंभीर थे कि फंसे हुए मेहमानों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था। आग और धुएं के बीच कई लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे, जबकि नीचे मौजूद स्थानीय लोग और बचाव दल उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश में जुटे रहे।