Delhi AQI: 'गैस चैंबर' बने दिल्ली-NCR में ठंड ने भी तोड़ा रिकॉर्ड! दिल्ली पर धुंध और पाला की दोहरी मार

Delhi-NCR AQI: आज सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 384 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी को दर्शाता है। इसके साथ ही शुक्रवार को पारा गिरने से दिसंबर की अब तक की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। दिल्ली के निवासी जहरीली हवा और धुंध के बीच ठिठुरने को मजबूर हैं

अपडेटेड Dec 06, 2025 पर 7:55 AM
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Delhi-NCR AQI: शुक्रवार को दिनभर धुंध की मोटी चादर छाई रही और 24 घंटे का औसत AQI 327 ('बहुत खराब') दर्ज किया गया

Delhi AQI Today: दिल्ली-एनसीआर और समूचे उत्तर भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस बार दिसंबर की शुरुआत बेहद गंभीर रही है। एक तरफ जहरीली हवा कहर जारी है, तो दूसरी तरफ कड़ाके की ठंड ने भी दस्तक दे दी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 384 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी को दर्शाता है। इसके साथ ही शुक्रवार को पारा गिरने से दिसंबर की अब तक की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। दिल्ली के निवासी जहरीली हवा और धुंध के बीच ठिठुरने को मजबूर हैं।

एनसीआर में और बुरे हालात

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी अधिक खराब रहा:


नोएडा: 418

फरीदाबाद: 402

गाजियाबाद: 379

गुरुग्राम: 361

लखनऊ: 355

चंडीगढ़: 313

दिल्ली के कुछ इलाकों में भी स्थिति बहुत खराब थी, जैसे दिल्ली कैंट (402) और नई दिल्ली (388)।

5.6°C पहुंचा पारा, दिसंबर की रिकॉर्ड तोड़ ठंड

प्रदूषण के साथ-साथ, राजधानी में ठंड भी तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान सामान्य से लगभग 3.9 डिग्री सेल्सियस कम था। इसके साथ ही 5 दिसंबर की सुबह इस साल की अब तक की सबसे ठंडी सुबह रही। शुक्रवार को दिनभर धुंध की मोटी चादर छाई रही और 24 घंटे का औसत AQI 327 ('बहुत खराब') दर्ज किया गया। बता दें कि पिछले साल 12 दिसंबर 2024 को न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

क्यों होता है प्रदूषण इतना गंभीर?

हर साल अक्टूबर से जनवरी के बीच दिल्ली 'गैस चैंबर' बन जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 13.7 प्रतिशत रहा, जो स्थानीय स्रोतों में सबसे अधिक है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों हरियाणा के झज्जर (11.8%), रोहतक (4.3%) और सोनीपत (3.4%) से आने वाले प्रदूषण ने भी दिल्ली की हवा को और खराब कर दिया है।

क्या करें और क्या न करें?

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लोगों को ये सलाह दी गई है:

मास्क पहनें: बाहर निकलते समय उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करें।

यात्रा टालें: अनावश्यक यात्रा से बचें, खासकर सुबह और शाम के समय।

घर के अंदर रहें: जब तक बहुत जरूरी न हो, तब तक घर के अंदर ही रहने को प्राथमिकता दें।

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