दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे AI समिट में शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ शर्टलेस होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने एक्शन भी लिया है। शर्टलेस प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आज दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों की पांच दिन की हिरासत की मांग की है। वहीं इस प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।
पुलिस ने कोर्ट में दी बड़ी जानकारी
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में कहा कि, नई दिल्ली में हुए AI समिट के दौरान सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बिना शर्ट के विरोध करने वाले यूथ कांग्रेस के सदस्य नेपाल के हिंसक ‘Gen Z’ आंदोलन से प्रेरित थे। पुलिस के मुताबिक, उसी तरह के आंदोलन ने नेपाल में वहां की सरकार को गिरा दिया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश हो सकती है। यह घटना एक बड़े और हाई-प्रोफाइल समिट के दौरान हुई थी, जिसमें दुनिया भर के नेता और टेक कंपनियों के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे।
पुलिस ने आगे कहा कि, आरोपियों को एक-दूसरे के साथ बैठाकर पूछताछ करनी होगी और डिजिटल सबूतों से भी उनका सामना कराना जरूरी है। मामले की गहराई से जांच बेहद जरूरी है। फिलहाल अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई कर रही है।
शर्टलेस होकर किया था प्रदर्शन
पुलिस ने अदालत में कहा कि, इस विरोध प्रदर्शन की फंडिंग की भी जांच की जानी चाहिए। इसमें यह पता लगाना जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों ने जो टी-शर्ट पहनी थीं, उनकी छपाई का खर्च किसने उठाया। इन टी-शर्ट्स पर “PM is compromised”, “India-US Trade Deal” और “Epstein Files” जैसे मैसेज लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने एक जैसी सफेद टी-शर्ट पहनी या हाथ में पकड़ी हुई थीं। इन पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें छपी थीं, साथ ही विरोध वाले नारे भी लिखे थे। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत मौके पर स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में चार प्रदर्शनकारियों को इस हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में कथित तौर पर बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
कांग्रेस पर हमलावर हुई भाजपा
वहीं प्रदर्शनकारियों के वकील ने अदालत में पुलिस के आरोपों का विरोध किया। उनका कहना था कि यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण था और किसी सरकारी कर्मचारी पर हमला नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उल्टा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई। वकील ने दलील दी, “ऐसा कोई वीडियो या सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि उन्होंने किसी पर हमला किया। बल्कि उन्हें ही बुरी तरह पीटा गया। जो धाराएं लगाई गई हैं, वे दूसरी राजनीतिक पार्टियों को संदेश देने की कोशिश हैं।” इस घटना के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भूपेंद्र यादव समेत बीजेपी नेताओं ने इस विरोध की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “राष्ट्र-विरोधी” बताया और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने भारत की छवि खराब करने की कोशिश की।