Red Fort Blast: लाल किला नहीं, आतंकियों के निशाने पर था ग्लोबल कॉफी चेन, 4 साल से रच रहे थे साजिश

Delhi Red Fort blast : आतंकियों को लगता था कि यह कॉफी ब्रांड यहूदी प्रभाव से जुड़ा हुआ है, क्योंकि इसके ग्लोबल विस्तार के समय एक यहूदी चीफ एग्जीक्यूटिव इससे जुड़े रहे थे। बताया गया है कि इन हमलों के जरिए गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक राजनीतिक संदेश देना उनका उद्देश्य था

अपडेटेड Jan 31, 2026 पर 4:48 PM
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Delih Blast: दिल्ली के लाल किले पर हुए सुसाइड अटैक को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।

दिल्ली के लाल किले पर हुए सुसाइड अटैक को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सुसाइड अटैक के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों का ग्रुप कथित तौर पर यहूदी के एक ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमला करने की साजिश रच रहा था। बता दें कि,पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में सेंट्रल एजेंसियों को एक बड़ी आतंकी साजिश का पता चला है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों का मकसद ऐसे स्थानों को निशाना बनाना था, जहां ज़्यादा लोग आते-जाते हैं।

ग्लोबल कॉफी चेन को निशाना 

जानकारी के मुताबिक, आतंकियों को लगता था कि यह कॉफी ब्रांड यहूदी प्रभाव से जुड़ा हुआ है, क्योंकि इसके ग्लोबल विस्तार के समय एक यहूदी चीफ एग्जीक्यूटिव इससे जुड़े रहे थे। बताया गया है कि इन हमलों के जरिए गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक राजनीतिक संदेश देना उनका उद्देश्य था। फिलहाल, इस पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। यह जानकारी आठ आरोपियों से लगातार पूछताछ के दौरान सामने आई है। इन आरोपियों में तीन मेडिकल प्रोफेशनल भी शामिल हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के मुज़म्मिल अहमद गनई और अदील अहमद राथर, और उत्तर प्रदेश के शाहीन सईद का नाम है। पूछताछ में इन डॉक्टरों ने अधिकारियों को बताया कि टारगेट चुनने को लेकर आतंकी मॉड्यूल के अंदर काफी मतभेद थे।


देश में बड़े हमले की था साजिश 

सूत्रों के मुताबिक, मॉड्यूल के कई सदस्य आम लोगों की जगहों पर हमला करने के खिलाफ थे। उनका कहना था कि कोई भी कार्रवाई सिर्फ जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों तक ही सीमित रहनी चाहिए। हालांकि, कार ब्लास्ट में मारे गए हमलावर  उमर-उन-नबी इस बात पर अड़ा हुआ था कि घाटी से बाहर ज़्यादा भीड़-भाड़ और चर्चित जगहों को निशाना बनाया जाए। उसका मानना था कि इससे हमले का असर ज्यादा होगा और संदेश दूर तक जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि उमर-उन-नबी और उसके साथियों का मानना था कि बड़े शहरों में कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमला करने से उनका संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगा। वे इसके जरिए मुसलमानों, खासकर गाजा में, उनके अनुसार हो रहे “अन्याय” की ओर लोगों का ध्यान खींचना चाहते थे। ब्लास्ट के सात दिन बाद, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जसीर वानी को गिरफ्तार किया।

जांच में सामने आया है कि वानी को ड्रोन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने लायक बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वह हमास जैसे हमलों की योजना पर भी चर्चा में शामिल था। इन योजनाओं में देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ कार बम धमाके करने की बात भी शामिल थी। पूछताछ के दौरान जसीर वानी ने बताया कि उमर-उन-नबी ने पहले उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए उकसाने की कोशिश की थी। लेकिन वानी घबरा गया और उसने इसका विरोध किया। बाद में वह सीधे हमले की बजाय एक सहायक भूमिका में इस मॉड्यूल से जुड़ने के लिए तैयार हो गया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे। वे ऐसे प्रचार से प्रभावित थे, जो स्थानीय आतंकी घटनाओं को दुनिया के दूसरे हिस्सों में चल रहे संघर्षों से जोड़ता है।

6 दिसंबर को होने वाला था बड़ा हमला

अधिकारियों का मानना है कि उमर-उन-नबी 6 दिसंबर के आसपास एक बड़ा हमला करना चाहता था। यह तारीख बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी से जुड़ी है। लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने करीब तीन हफ्ते तक एक संदिग्ध “व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल” की जांच की। जांच में इसके तार दो प्रतिबंधित संगठनों—जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद—से जुड़े पाए गए। यह जांच 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में शुरू हुई थी, जब सुरक्षा एजेंसियों को JeM का एक पर्चा मिला। इसके बाद नेटवर्क का पता लगाने के लिए निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने का काम तेज़ कर दिया गया।

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