Jhansi News: ट्रेन में बम की अफवाह बन गई 1700 यात्रियों की टेंशन, झांसी पहुंचकर खुला पूरा मामला

Jhansi News: छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में बम की खबर से अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही सूचना मिली, ट्रेन को झांसी स्टेशन पहुंचने से पहले ही दो किलोमीटर दूर रोक दिया गया। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर ट्रेन की तलाशी शुरू की। जांच के बाद यह सूचना अफवाह साबित हुई

अपडेटेड Jul 05, 2025 पर 11:28 AM
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Jhansi News: दिल्ली से झांसी तक ट्रेन फरीदाबाद, मथुरा, आगरा, धौलपुर और ग्वालियर जैसे कई अहम स्टेशनों से होकर गुजरती है।

छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12824) में बम की सूचना ने शुक्रवार की शाम पूरे रेलवे प्रशासन को हिला कर रख दिया। ट्रेन दिल्ली से अपने तय सफर पर रवाना हो चुकी थी, लेकिन महज कुछ मिनटों बाद आई एक कॉल ने सब कुछ बदल दिया। कॉलर ने ट्रेन में बम होने की बात कहकर हड़कंप मचा दिया। इसके बावजूद ट्रेन 400 किलोमीटर तक बिना जांच के चलती रही, जिससे उसमें सवार करीब 1700 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि बाद में ये सूचना अफवाह निकली, लेकिन तब तक कई सवाल खड़े हो चुके थे—अगर सूचना पहले मिल गई थी तो ट्रेन को तुरंत क्यों नहीं रोका गया?

क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल इतने धीमे हैं कि 400 किलोमीटर तक संभावित खतरे के बीच ट्रेन को यूं ही दौड़ने दिया जाए? ये घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है और भविष्य के लिए एक चेतावनी भी बनकर उभरी है।

दिल्ली में आई कॉल, झांसी तक चलता रहा सफर


हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से ट्रेन शाम 5:55 बजे रवाना हुई। लेकिन ठीक 10 मिनट बाद रेलवे हेल्पलाइन 'रेल मदद' पर एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि ट्रेन के स्लीपर कोच में बम है। कॉलर ने खुद को रेल उपयोगकर्ता बताया, लेकिन जब तक कॉल रेलवे तक पहुंची, ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी थी।

क्यों नहीं रोकी गई ट्रेन बीच रास्ते में?

दिल्ली से झांसी तक ट्रेन फरीदाबाद, मथुरा, आगरा, धौलपुर और ग्वालियर जैसे कई अहम स्टेशनों से होकर गुजरती है। बावजूद इसके, किसी भी स्टेशन पर ट्रेन को रोककर जांच नहीं की गई। रेलवे प्रशासन ने जीआरपी हेडक्वार्टर लखनऊ को सूचना जरूर दी, लेकिन ट्रेन को बिना स्टॉपेज रोके जाने का निर्णय नहीं लिया गया। नतीजा ये हुआ कि ट्रेन 400 किमी तक संभावित खतरे के साथ दौड़ती रही।

झांसी में ट्रेन को घेरा सुरक्षा घेराबंदी ने

ट्रेन झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर रात 11:31 बजे 9 मिनट की देरी से पहुंची। प्लेटफॉर्म नंबर 2 को पहले ही खाली करा लिया गया था और स्टेशन को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट, जीआरपी, आरपीएफ, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता पहले से अलर्ट पर थे।

यात्रियों को उतारा गया, लगेज की भी जांच

जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, सभी कोच खाली कराए गए और यात्रियों को लगेज सहित नीचे उतारा गया। इसके बाद करीब 50 मिनट तक डॉग स्क्वायड और बम डिस्पोजल टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया। राहत की बात ये रही कि कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

1700 यात्रियों की जान रही जोखिम में

22 कोच वाली इस ट्रेन में लगभग 1700 से अधिक मुसाफिर सवार थे। 6 स्लीपर, 5 थर्ड एसी, 3 फर्स्ट और सेकेंड एसी, जनरल और दिव्यांग कोच, एक पेंट्रीकार समेत पूरी ट्रेन की जांच की गई। इतने लोगों की जान 400 किलोमीटर तक बिना सुरक्षा जांच के खतरे में रही।

अब बम की झूठी सूचना देने वाले की तलाश जारी

जिस व्यक्ति ने बम की सूचना दी, उसने देश भर में हड़कंप मचा दिया। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए। अब उस कॉलर की तलाश की जा रही है जिसने झूठी खबर फैलाकर यात्रियों की जान और रेलवे संचालन को खतरे में डाला।

पहले से थी सूचना

रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने माना कि ट्रेन चलने के कुछ ही देर बाद उन्हें सूचना मिल गई थी, लेकिन ट्रेन को झांसी तक चलने दिया गया। अब ये जांच का विषय है कि ट्रेन को पहले क्यों नहीं रोका गया और सुरक्षा को इतनी देर तक क्यों टाल दिया गया।

अफवाह या साजिश?

फिलहाल ट्रेन आगे के लिए रवाना हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा बलों की जांच अभी जारी है। ये केवल एक अफवाह थी या किसी बड़ी साजिश की शुरुआत – इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि रेलवे को अब अपनी रियल टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम पर काम करना होगा।

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