तिरंगा यात्रा में जाने से रोके गए देवेंद्र महतो, पुलिस पर मारपीट का आरोप...सामने आया वीडियो

महतो ने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होना चाहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों रोका जा रहा है। महतो ने कहा, "80 साल बाद हमें एहसास हुआ है कि हमें सिर्फ नाम की आजादी मिली है। संविधान के किस नियम के तहत मुझे रोका जा रहा है

अपडेटेड Aug 15, 2026 पर 4:00 PM
देवेंद्र नाथ महतो ने शनिवार को पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया।

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने शनिवार को पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में होने वाली तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए जब वह अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। रिपोर्ट के मुताबिक, महतो पिछले 14 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

महतो का दावा है कि पुलिस के साथ हुई झड़प में उनके सीने पर चोट लगी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस समय प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और गड़बड़ी की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। महतो ने 2 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले रांची विधानसभा का घेराव करने के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ गई थी। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले व पानी की बौछार का भी इस्तेमाल किया था।


महतो का पुलिस पर मारपीट का आरोप

महतो ने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होना चाहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों रोका जा रहा है। महतो ने कहा, "80 साल बाद हमें एहसास हुआ है कि हमें सिर्फ नाम की आजादी मिली है। संविधान के किस नियम के तहत मुझे रोका जा रहा है?"

महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अन्य पोस्ट में बताया कि जैसे ही उन्होंने तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई, उनके अस्पताल के कमरे के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के नागरिकों को अपने ही देश में तिरंगा यात्रा में शामिल होने की आजादी नहीं है।

घटना के एक वीडियो में एक सुरक्षा अधिकारी महतो को अस्पताल से बाहर जाने से रोकता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में कई जेएलकेएम कार्यकर्ता अधिकारी से महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने देने की अपील करते नजर आ रहे हैं। वहीं, अधिकारी उन्हें भूख हड़ताल कर रहे महतो को आराम करने देने के लिए कहता हुआ दिखाई देता है। महतो ने अस्पताल के बिस्तर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग छात्र आंदोलन को भटकाने और उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने और आपसी एकता बनाए रखने की भी अपील की।

हेमंत सोरेन ने पारदर्शिता का भरोसा दिलाया

इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने खास तौर पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा, "मेरे लिए राज्य के युवा और उनका हम पर भरोसा बहुत महत्वपूर्ण है। हमने व्यवस्था में बदलाव लाने का फैसला किया है। पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित की जाएगी।"

उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए छात्रों से सुझाव लेने की पहल शुरू की है। इसका नाम 'छात्रों की बात – छात्रों के साथ' रखा गया है। इससे पहले छात्र नेता रविंदर पासवान ने कहा था कि प्रदर्शनकारी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आजादी और उसके महत्व पर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि शनिवार को प्रदर्शनकारी सरकार के सामने अपनी मांगें नहीं रखेंगे।

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