JNU में उमर खालिद की किताब पर बवाल, आखिरी वक्त पर वेन्यू रद्द...नारेबाजी से गरमाया कैंपस

यह कार्यक्रम ‘इंटरनेशनल डे ऑफ द वर्ल्ड्स इंडिजिनस पीपल्स’ यानी दुनिया के मूल निवासियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का आयोजन मूल रूप से दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-1 (SSS-1) के ऑडिटोरियम में होना था

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 10:19 PM
JNU में उमर खालिद की किताब पर कार्यक्रम को लेकर हंगामा

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में जेल में बंद स्कॉलर उमर खालिद की किताब ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज़: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर’ पर चर्चा के दौरान सोमवार को हंगामा हो गया। कार्यक्रम के दौरान काफी नारे लगाए गए और दोनों पक्षों के बीच टकराव जैसी स्थिति बन गई। बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम शुरू होने से कुछ समय पहले ही इसके लिए बुक की गई जगह रद्द कर दी थी। इसके बावजूद कार्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच विरोध और समर्थन देखने को मिला।

यह कार्यक्रम ‘इंटरनेशनल डे ऑफ द वर्ल्ड्स इंडिजिनस पीपल्स’ यानी दुनिया के मूल निवासियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का आयोजन मूल रूप से दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-1 (SSS-1) के ऑडिटोरियम में होना था। हालांकि, आखिरी समय में वेन्यू की बुकिंग रद्द किए जाने के बाद कार्यक्रम को लेकर विवाद और बढ़ गया।

JNU ने आखिरी समय पर कार्यक्रम की जगह की बुकिंग रद्द की


कार्यक्रम शुरू होने से कुछ समय पहले ही जेएनयू प्रशासन ने ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी और कार्यक्रम की अनुमति वापस ले ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में जेएनयू प्रशासन ने कहा कि आयोजकों ने कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी विश्वविद्यालय को नहीं दी थी, इसलिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की गई।

विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा कि जेएनयू एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है। कार्यक्रम की अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस) के डीन ने दी थी और उसे रद्द करने की कार्रवाई भी उन्हीं की ओर से की गई। हालांकि, कार्यक्रम की जगह रद्द होने के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंच गए। बताया गया कि चर्चा के लिए करीब 300 से 400 छात्र इकट्ठा हुए। इस दौरान एसएसएस-2 ब्लॉक के बाहर उमर खालिद की किताब की प्रतियां भी बेची गईं। खालिद पहले इसी ब्लॉक में पढ़ाई कर चुका है। मौके पर झारखंड ट्राइबल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में कौन-कौन वक्ता शामिल थे?

कार्यक्रम के पोस्टर के मुताबिक, चर्चा में कई जाने-माने वक्ताओं को शामिल किया गया था। पैनल में इतिहासकार प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धाब्रत सेनगुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और सामाजिक कार्यकर्ता बनोज्योत्स्ना लाहिड़ी शामिल थीं। बनोज्योत्स्ना लाहिड़ी उमर खालिद की पार्टनर भी हैं। कार्यक्रम की शुरुआत जेएनयू एआईएसए की अध्यक्ष अदिति के शुरुआती भाषण से हुई। उन्होंने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन जताया और कार्यक्रम की जगह की बुकिंग रद्द किए जाने के विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए।

अदिति ने सवाल उठाया कि प्रशासन को जेएनयू के एक पूर्व छात्र की लिखी किताब से आपत्ति क्यों है, जबकि उमर खालिद अभी बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र एक मुस्लिम व्यक्ति के एक्टिविज्म के प्रतीक के रूप में उभरने से परेशान है और उसे इतिहासकार के रूप में पहचान देने के बजाय हाशिए पर रखना चाहता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम की जगह रद्द करने का फैसला धोखे से लिया गया और प्रशासन ने अपने इस कदम के पीछे कोई ठोस वजह नहीं बताई।

ABVP ने कार्यक्रम रद्द करने के फैसले का समर्थन किया

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जेएनयू प्रशासन की ओर से कार्यक्रम की जगह की बुकिंग रद्द करने के फैसले का समर्थन किया। ABVP ने उमर खालिद को “देश-विरोधी” बताया और कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शुरुआत में कार्यक्रम को अनुमति देना ही गलत था। CNN-News18 को दिए बयान में ABVP सदस्यों ने कहा कि वे SSS-1 में होने वाली चर्चा को जबरन रोकने की कोशिश नहीं करेंगे। हालांकि, उनका कहना था कि अगर JNUSU कैंपस में हंगामा करने की कोशिश करता है, तो वे स्थिति संभालने में विश्वविद्यालय प्रशासन की मदद करेंगे।

प्रोफेसर के भाषण के दौरान हुआ हंगामा

कार्यक्रम में प्रोफेसर प्रभु महापात्रा के भाषण के दौरान हंगामा शुरू हो गया। महापात्रा ने बताया कि वह झारखंड के उसी इलाके में पले-बढ़े हैं, जहां से उमर खालिद का संबंध है। उन्होंने अपनी बात में किताब की शैक्षणिक अहमियत और शोध के तरीके पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किताब अलग-अलग वर्गों और समुदायों के बीच मौजूद विरोधाभासों को समझने की कोशिश करती है। महापात्रा ने मौजूदा राजनीतिक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके पास संसाधन हैं और जो उन संसाधनों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और आदिवासी आबादी के भविष्य के बीच के अंतर को भी चर्चा का अहम हिस्सा बताया।

नारों के जवाब में लगे नारे

कुछ ही देर बाद एबीवीपी समर्थक छात्रों ने प्रोफेसर प्रभु महापात्रा के भाषण के बीच विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर लिए हुए थे। इनमें से एक पोस्टर पर सवाल लिखा था, “क्या उमर के पिता सिमी आतंकी संगठन से जुड़े नहीं थे?” इसके साथ छात्र “इस्लामाबाद की खबर खुदेगी” जैसे नारे भी लगा रहे थे। एक अन्य पोस्टर में सवाल किया गया, “क्या उमर खालिद ने अफजल गुरु का बचाव नहीं किया?” वहीं एक और पोस्टर पर लिखा था, “पाकिस्तान में हिंदुओं के पास मानवाधिकार क्यों नहीं हैं?”

एबीवीपी समर्थक छात्रों ने कार्यक्रम में मौजूद पैनल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब चर्चा में शामिल लोग एक “एलीट पैनल” का हिस्सा हैं, तो वे समाज के हाशिए पर रहने वाले समुदायों की समस्याओं और उनके सामने मौजूद असमानताओं पर किस तरह चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान एसएसएस-2 के पास नारेबाजी जारी रही, जिससे कैंपस का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

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