रेलवे स्टेशनों के पानी में मिला E. coli बैक्टीरिया! CAG ऑडिट में 458 Railway Stations फेल, टॉयलेट की भी कमी
Ecoli in Drinking water: देश के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में गंभीर कमियां सामने आई हैं। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, कई रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की जांच में E. coli और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई
E. coli in Drinking water: बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं (Image generated using AI)
E. coli in Drinking water: भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने देश के रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की खराब क्वालिटी का चौंकाने वाला खुलासा किया है। CAG ने कहा कि जांच के दौरान रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया समेत कुल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। CAG ने रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी में E. coli बैक्टीरिया पाए जाने पर चिंता जताई है। CAG ने पाया कि हालांकि रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए कई मानक तय किए हैं। लेकिन अलग-अलग रेलवे जोन इनका पालन करने में नाकाम रहे। इसके कारण सेवाओं में बड़ी कमियां आईं। जैसे कि वॉटर कूलर से मिलने वाले पानी में E. coli बैक्टीरिया का मिलना और शौचालयों में गंदगी समेत अन्य प्रमुख कमियां शामिल हैं।
CAG ने यह जानकारी अपनी रिपोर्ट 'इंडियन रेलवेज में नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता' में दी। यह रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद में पेश की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच नहीं की गई थी।
CAG ने सभी रेलवे जोन के 512 नॉन-सबअर्बन कैटेगरी वाले स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की जांच की। उसे दक्षिणी रेलवे जोन के दो स्टेशनों (कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन), दक्षिण मध्य रेलवे जोन के एक स्टेशन (हैदराबाद), मध्य रेलवे जोन के चार स्टेशनों (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला) और पूर्वी रेलवे जोन के एक स्टेशन (मधुपुर) पर वॉटर कूलर से लिए गए पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया मिले।
CAG रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए पीने के पानी के सैंपल में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (जिसमें E. coli भी शामिल है) पाए गए।
8 रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर में मिला E. coli
रिपोर्ट के मुताबिक, पीने के पानी के सैंपल की जांच के दौरान 8 रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर में E. coli बैक्टीरिया पाया गया। इनमें दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन और मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला शामिल हैं। इसके अलावा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन में भी पानी के सैंपल में E. coli पाया गया। E. coli की मौजूदगी पानी के दूषित होने का संकेत मानी जाती है। यह यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है।
56 स्टेशनों के पानी में मिली कोलीफॉर्म बैक्टीरिया
CAG रिपोर्ट में बताया गया कि आठ रेलवे जोन में 2022-23 के दौरान 49 स्टेशनों के नलों से लिए गए पानी के सैंपल की जांच में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई। वहीं, 2023-24 में नौ रेलवे जोन के 56 स्टेशनों से लिए गए पानी के सैंपल में भी कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता और नियमित जांच व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है।
458 रेलवे स्टेशनों पर जरूरी सुविधाओं की कमी
CAG ने 512 चयनित रेलवे स्टेशनों का अध्ययन किया। इनमें से 458 स्टेशन यात्रियों के लिए न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कमतर पाए गए। कैग रिपोर्ट में CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी कुछ यात्री सुविधाओं में कमियां बताई गई हैं। इनमें बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता सुविधाएं, डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड जैसी सुविधाओं से जुड़ी कमियां शामिल हैं।
201 स्टेशनों पर टॉयलेट की कमी
CAG की रिपोर्ट में यात्री सुविधाओं से जुड़ी कमियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। 'Passenger Amenities Management System' के ऑडिट में सामने आया कि 201 स्टेशनों पर टॉयलेट की कमी है। इसके अलावा 403 स्टेशनों पर यूरिनल की कमी और 2,035 स्टेशनों पर पानी की कमी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं।
ऑडिट के बाद रेलवे ने शुरू की 'Tank to Tap' योजना
CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे मंत्रालय ने पेयजल व्यवस्था में सुधार को लेकर समीक्षा बैठक की। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट में सामने आई कमियों की समीक्षा की। रेलवे ने बताया कि करीब 20,000 स्थानों पर 'Tank to Tap' वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा।
इसके तहत पानी की टंकियों को बदला जाएगा। साथ ही नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। रेलवे के अनुसार, पानी के स्रोत और आउटलेट पर नियमित टेस्टिंग की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता की केंद्रीकृत निगरानी, जवाबदेही और टंकियों की निर्धारित समय पर सफाई की व्यवस्था भी की जाएगी।