EAM Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ बैठक की। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ हो रहे सेलेक्टिव टारगेटिंग पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को विभिन्न मोर्चों पर निशाना बनाना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने पोलैंड को भारत के पड़ोसी क्षेत्र में आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' दिखाने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि पोलैंड को उस क्षेत्र में आतंकी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने में मदद नहीं करनी चाहिए। जयशंकर का यह बयान पोलैंड के विदेश मंत्री की हालिया पाकिस्तान यात्रा के बाद आया है।
सामरिक और आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय
अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर पहुंच गए है। जयशंकर ने व्यापारिक संबंधों पर जोर देते हुए निम्नलिखित तथ्य साझा किए:
द्विपक्षीय व्यापार: मध्य यूरोप में पोलैंड भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। पिछले दशक में व्यापार 200% बढ़कर लगभग 7 बिलियन डॉलर हो गया है।
भारतीय निवेश: पोलैंड में भारतीय कंपनियों ने 3 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिससे वहां बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हुआ है।
एक्शन प्लान 2024-28: दोनों पक्ष रक्षा, सुरक्षा, क्लीन टेक्नोलॉजी और डिजिटल नवाचार में सहयोग को और मजबूत करने के लिए अगले चार वर्षों के रोडमैप पर काम कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच है ऐतिहासिक संबंध
विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव और ऐतिहासिक विरासत को भी याद किया। उन्होंने 'डोब्री महाराज' (जाम साहेब) की विरासत और 'जाम साहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम' का उल्लेख किया, जो दोनों देशों के गहरे मानवीय संबंधों का प्रतीक है। पोलैंड में भारतीय संस्कृति, योग और इंडोलॉजी (भारत-विद्या) की बढ़ती लोकप्रियता की उन्होंने सराहना की। जयशंकर ने दोहराया कि पोलैंड सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ है। उन्होंने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख को स्पष्ट किया और वैश्विक शांति के लिए आतंकवाद के विरुद्ध साझा सिद्धांत अपनाने पर बल दिया।