अफ्रीकी देश कांगो से लौटे एक 37 साल के बिजनेसमैन और उनके संपर्क में आए तीन अन्य लोगों को अहमदाबाद के अस्पतालों में अलग वार्ड (आइसोलेशन) में भर्ती किया गया है। इन सभी के खून के सैंपल लेकर इबोला वायरस (Ebola Virus) की जांच के लिए भेजे गए हैं। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बताया कि अभी तक किसी में भी इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।
वडोदरा से अहमदाबाद किया गया शिफ्ट
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, यह कारोबारी करीब 5 से 7 दिन पहले कांगो से मुंबई आया था और फिर वहां से वडोदरा पहुंचा। वडोदरा में उसे तेज बुखार आया, जिसके बाद उसे वहां के बैंकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
एहतियात के तौर पर बाद में मरीज को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में बने खास इबोला वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। मरीज की हालत अभी बिल्कुल स्थिर है और उसका बुखार भी काबू में है।
संपर्क में आए लोग भी डॉक्टरों की निगरानी में
इस कारोबारी के साथ आए दो अन्य साथियों को अहमदाबाद के SVP अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। साथ ही, एक और व्यक्ति जो इनके संपर्क में आया था, उसे भी अलग थलग कर दिया गया है।
10-11 दिन रहना होगा अलग: प्रशासन का कहना है कि इन चारों लोगों को 10 से 11 दिनों तक डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में अलग रखा जाएगा। इनके सैंपल जांच के लिए पुणे की लैब में भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, बाकी तीनों लोगों में बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं दिख रहा है।
एयरपोर्ट पर सख्त चेकिंग, सरकार की पूरी तैयारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में (17 मई को) कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का जन स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है।
इसके बाद से ही गुजरात सरकार अलर्ट पर है:
अफवाहों पर न दें ध्यान: स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें।
उन्होंने कहा, "इससे पहले भी एक ऐसा ही संदिग्ध मामला सामने आया था, लेकिन जांच के बाद उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इस बार भी हमने सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया है। फिलहाल भारत या गुजरात में इबोला का एक भी पक्का मामला नहीं है।"
सरकार ने कहा है कि अगर किसी को भी ऐसा कोई लक्षण दिखे या कोई शक हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।