हीरा ग्रुप निवेश घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ी सफलता मिली है। ईडी के हैदराबाद कार्यालय ने नाज़नीन अंसारी उर्फ आबिदा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज़ और उसकी प्रमुख नौहेरा शेख समेत अन्य लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में कई एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर उनसे बड़ी रकम जुटाई थी। आरोप है कि निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से पैसा लिया गया और उन्हें बेहद ऊंचे रिटर्न का वादा किया गया। अब ईडी इस पूरे मामले में पैसों के लेनदेन और कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही है।
जांच में सामने आया है कि हीरा ग्रुप ने देशभर के करीब 1.72 लाख निवेशकों से लगभग 3,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, कंपनी की प्रमुख नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों ने लोगों को हर साल करीब 36 प्रतिशत तक मुनाफा देने का वादा किया था। हालांकि, जांच एजेंसी का आरोप है कि निवेशकों को न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही समय पर उनका पैसा लौटाया गया। इसी मामले में ईडी ने पिछले सप्ताह नौहेरा शेख को भी गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान ये भी पता चला कि, बड़ी मात्रा में निवेश विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जुटाया गया था। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों में रहने वाले NRI शामिल थे। ईडी अब इस पूरे मामले में पैसों के लेनदेन और निवेशकों से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल की गहराई से जांच कर रही है।
नौहेरा शेख की निजी सहायक भी गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, नाजनीन अंसारी नौहेरा शेख की निजी सहायक के रूप में काम करती थी। जांच में सामने आया कि वह उन संपत्तियों के प्रबंधन में भी एक्टिव रूप से शामिल थी, जिन्हें जांच एजेंसियों ने पहले ही कुर्क कर रखा था। ईडी का आरोप है कि नाजनीन अंसारी इन संपत्तियों से किराया वसूलने, निवेशकों से जुड़े मामलों को संभालने और कंपनी की ओर से विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ पत्राचार करने का काम करती थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, उसने कई ऐसी संपत्तियों का इस्तेमाल और नियंत्रण जारी रखा, जिन्हें कथित तौर पर अवैध कमाई से खरीदा गया माना गया है। ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग जारी रखने में नाजनीन अंसारी की अहम भूमिका रही है। फिलहाल एजेंसी मामले की आगे जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
ऑक्शन में रुकावट डालने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में ऐसे सबूत मिलने का दावा किया गया है, जिनसे पता चलता है कि नाज़नीन अंसारी ने कथित तौर पर अवैध कमाई से जुड़ी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में रखने, उनका इस्तेमाल करने और उनसे आय अर्जित करने में मदद की। एजेंसी का मानना है कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। ईडी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पीड़ित निवेशकों का पैसा वापस दिलाने के लिए अंसारी के नियंत्रण वाली कई संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन जांच में सामने आया कि उन्होंने कथित तौर पर अपने कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि वे अधिकारियों को संपत्तियों का जांच न करने दें।
एजेंसी का कहना है कि इससे नीलामी की प्रक्रिया प्रभावित करने और जांच में बाधा डालने की कोशिश की गई। ईडी ने साफ किया है कि कानूनी कार्रवाई से बचने, जांच में हस्तक्षेप करने या पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में रुकावट डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है और एजेंसी पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।