देश में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो (El Nino) की स्थिति मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है। इससे बारिश पर असर पड़ने और फसलों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
एल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का समुद्री तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में एल नीनो को आमतौर पर कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़कर देखा जाता है।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति पहले से मौजूद है और मानसून के महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।
IMD ने अपने ताजा बुलेटिन में बताया कि समुद्र के बढ़ते तापमान का असर अब वातावरण पर भी साफ दिखाई दे रहा है और मौसम प्रणाली पूरी तरह एल नीनो जैसी स्थिति दिखा रही है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून के दौरान एल नीनो और मजबूत हो सकता है, जिससे बारिश का पैटर्न प्रभावित हो सकता है।
2023 में भी आया था एल नीनो
इससे पहले साल 2023 में भी एल नीनो की स्थिति बनी थी। इसके अलावा 2002, 2009 और 2015 में भी ऐसे हालात देखने को मिले थे। इन वर्षों में कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी।
197 जिले सबसे ज्यादा खतरे में
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में बताया कि देश के 197 जिलों को एल नीनो के असर के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हर राज्य के लिए अलग-अलग आपात योजना तैयार की है और किसानों को जागरूक करने के लिए "खेत बचाओ अभियान" भी चलाया जा रहा है।
कृषि मंत्रालय हर हफ्ते स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए बीज समेत अन्य कृषि सामग्री का भंडारण भी कर लिया गया है।
सामान्य से कम रह सकती है बारिश
IMD ने इस साल मानसून को लॉन्ग पीरियड एवरेज का करीब 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इसका मतलब है कि इस बार बारिश सामान्य से कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून के दूसरे हिस्से में एल नीनो और मजबूत हुआ तो खेती-किसानी पर इसका असर बढ़ सकता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है और धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल देश के लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्से में मानसून सक्रिय है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 जुलाई तक मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा।
किसानों के लिए चिंता की बात
कम बारिश की स्थिति में धान, मक्का, दालें और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सरकार और किसान दोनों एल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अगर आने वाले हफ्तों में एल नीनो और मजबूत होता है, तो इस साल मानसून और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।