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अल नीनो का बड़ा अलर्ट! भारत में सूखे का खतरा बढ़कर 70% हुआ, स्काईमेट ने इकॉनमी और जीडीपी पर असर को लेकर ये बताया

अगस्त के पहले पखवाड़े में हर दिन बारिश मासिक औसत से कम रही, जिससे अगस्त महीने का घाटा महीने की शुरुआत के 11% से बढ़कर 13% हो गया है। जून में बना घाटा और अगस्त में जारी कमी को देखते हुए अब मानसून का सामान्य स्तर पर लौटना लगभग असंभव लगता है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Aug 18, 2026 पर 4:45 PM
अल नीनो का बड़ा अलर्ट! भारत में सूखे का खतरा बढ़कर 70% हुआ, स्काईमेट ने इकॉनमी और जीडीपी पर असर को लेकर ये बताया
भारत में सूखे का खतरा बढ़कर 70% हुआ, स्काईमेट ने इकॉनमी और जीडीपी पर असर को लेकर ये बताया

देश में मानसूनी बारिश की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। इस बीच मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट वेदर सर्विसेज ने इस मानसून सीजन में भारत में सूखे की स्थिति की संभावना को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया है। स्काईमेट के संस्थापक और चेयरमैन जतिन सिंह के मुताबिक जून से शुरू हुई बारिश की कमी का यह सिलसिला मजबूत अल नीनो के असर की वजह से सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है। हमारे सहयोगी CNBC TV18 को दिए एक इंटरव्यू में जतिन सिंह ने मानसून की स्थिति, राज्यों पर इसके असर और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तार से बात की है।

जतिन सिंह के मुताबिक ऐतिहासिक आंकड़ों और पिछले 60 से 70 वर्षों के रुझानों को देखें तो सूखे वाले वर्षों में आमतौर पर भारत की जीडीपी में 1 फीसदी की गिरावट या कमी आती है। इस सूखे का सीधा असर बिजली, खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था समेत अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों पर पड़ता है। हालांकि सरकार द्वारा फूड स्टॉक की सप्लाई का उचित प्रबंधन किए जाने की वजह से अब तक फॉसिल फ्यूल की ऊंची कीमतों के बावजूद खाद्य कीमतों में भारी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन सूखे के साल में किसी न किसी मोड़ पर यह दबाव सामने आ ही जाता है।

अगस्त और सितंबर में औसतन 85% ही होगी बारिश, सामान्य मानसून की संभावना शून्य

आने वाले हफ्तों और पूरे सीजन के लिहाज पर बात करते हुए जतिन सिंह ने कहा कि अगस्त और सितंबर महीनों में बारिश मासिक औसत के लगभग 85 फीसदी के करीब रहने का ही अनुमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सीजन में अधिक बारिश के साथ समाप्त होने की संभावना 0 प्रतिशत है। मौसम के गणित को समझाते हुए उन्होंने बताया कि अधिक बारिश की संभावना 0% है। सामान्य से कम बारिश की संभावना 80% है। सूखे की संभावना जो पहले 60% थी, वह अब बढ़कर 70% हो गई है। ऐसे में सबसे बेहतर स्थिति यह हो सकती है कि बारिश सामान्य औसत का 90 से 95% रहे, जैसा कि साल 2023 के मानसून में देखा गया था। लेकिन इस समय सबसे संभावित परिदृश्य 90% से कम बारिश का है, जो स्पष्ट रूप से भारत को सूखे की ओर लेकर जाता है।

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