El Nino Update: दुनिया के कई देशों में आने वाले महीनों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। इसकी वजह है 'अल नीनो' है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो भारत की खरीफ फसलों, किसानों की आय और महंगाई के लिए चुनौती बन सकता है। मौसम विभाग ने सामान्य से कम मानसून का अनुमान जताया है। वहीं भारत में अल नीनो के पड़ने वाले प्रभाव को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी जानकारी दी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने देश के 197 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां अल नीनो का सबसे अधिक असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए हर राज्य के लिए अलग-अलग इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि मंत्रालय "खेत बचाओ अभियान" नाम से देशभर में विशेष अभियान भी चला रहा है।
मीडिया से बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, अल नीनो को लेकर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि अभी इसकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सबसे अधिक प्रभावित हो सकने वाले 197 जिलों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय हर सप्ताह बैठकें कर अल नीनो से जुड़े हालात की समीक्षा कर रहा है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बीज और खेती से जुड़ी अन्य जरूरी सामग्री का पर्याप्त भंडार भी तैयार रखा गया है।
अल नीनो का पड़ सकता है प्रभाव
बता दें कि, अल नीनो एक मौसम संबंधी स्थिति है, जिसका असर अक्सर मानसून और बारिश पर पड़ता है। आमतौर पर इसके कारण बारिश कम हो सकती है और मौसम का पैटर्न अनिश्चित हो जाता है। इसी वजह से इस साल भी अल नीनो को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश सामान्य स्तर से कम रहने की संभावना है। विभाग का अनुमान है कि देश में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से कम वर्षा का संकेत माना जाता है। ऐसे में कृषि क्षेत्र और किसानों पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून के दूसरे चरण में अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो फसलों को नुकसान होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है और धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल मानसून देश के लगभग 20 से 30 प्रतिशत क्षेत्र को कवर कर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के 15 जुलाई के आसपास पूरे देश में पहुंच जाने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम की स्थिति और अल नीनो के प्रभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका असर खेती और किसानों पर पड़ सकता है।