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फ्लोर टेस्ट या गवर्नर का फैसला? गोवा से कर्नाटक तक... पुराने फॉर्मूले में फंसा तमिलनाडु का सत्ता संकट कैसे सुलझेगा

Tamil Nadu Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट ने भी एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामले में कहा था कि बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में होना चाहिए। यानी असली ताकत सदन में साबित होती है, सिर्फ कागजों पर नहीं। इसी वजह से माना जा रहा है कि तमिलनाडु के राज्यपाल भी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि TVK और कांग्रेस का समर्थन सच में स्थायी और भरोसेमंद है या नहीं

Curated By: Shubham Sharmaअपडेटेड May 07, 2026 पर 9:07 PM
फ्लोर टेस्ट या गवर्नर का फैसला? गोवा से कर्नाटक तक... पुराने फॉर्मूले में फंसा तमिलनाडु का सत्ता संकट कैसे सुलझेगा
Tamil Nadu Crisis: फ्लोर टेस्ट या गवर्नर का फैसला? गोवा से कर्नाटक तक... पुराने फॉर्मूले में फंसा तमिलनाडु का सत्ता संकट कैसे सुलझेगा

तमिलनाडु में राज्यपाल आरवी अर्लेकर और विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के बीच सरकार गठन को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। TVK चुनाव में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। कांग्रेस के समर्थन पत्र मिलने के बावजूद राज्यपाल ने अब तक दो बार विजय को सरकार बनाने का न्योता देने से इनकार कर दिया है।

राज्यपाल का कहना है कि TVK के पास अभी “पूर्ण बहुमत” नहीं है। इसी बात को लेकर अब बहस शुरू हो गई है कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले मौका किसे मिलना चाहिए- सबसे बड़ी पार्टी को या चुनाव बाद बने गठबंधन को?

संविधान और नियम क्या कहते हैं?

1988 में बनी सरकारिया आयोग ने इस तरह की स्थिति के लिए कुछ दिशानिर्देश दिए थे। उसके मुताबिक:

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