LPG New Rule: LPG सिलेंडर बुकिंग का बदला नियम, जानें अब कितने दिनों बाद मिलेगा दूसरा रिफिल

सरकार ने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर दिया है और कमर्शियल कनेक्शन के बजाय घरेलू LPG को प्रायोरिटी देने का भी ऑर्डर दिया है। सूत्रों ने कहा, "घरेलू कंज्यूमर हमेशा प्रायोरिटी रहेंगे," क्योंकि भारत और LPG पार्टनर ढूंढ रहा है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 10:38 PM
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युद्ध के हालातों ने अब सीधे आम आदमी की रसोई पर असर डालना शुरू कर दिया है।

दुनिया भर में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन और युद्ध के हालातों ने अब सीधे आम आदमी की रसोई पर असर डालना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी जंग से दुनिया के कई देश प्रभवि हो रहे हैं। दुन‍िया भर के बदलते हालातों और सप्लाई चेन की चुनौतियों को देखते हुए सेंट्रल गवर्नमेंट ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग नियम में बड़ा बदलाव कर द‍िया है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए LPG बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

सरकार ने बदल दिया नियम

जानकारी के मुताबिक, ऐसे मामले सामने आए हैं कि जो लोग पहले 55 दिनों में LPG सिलेंडर बुक करते थे, उन्होंने अब 15 दिनों में सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया है। इस अफरा-तफरी और स्टॉक दबाने की आदत को रोकने के लिए बुकिंग का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी अब आप एक सिलेंडर लेने के बाद 25 दिन से पहले दूसरी बुकिंग नहीं कर पाएंगे। वही सरकार ने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर दिया है और कमर्शियल कनेक्शन के बजाय घरेलू LPG को प्रायोरिटी देने का भी ऑर्डर दिया है। सूत्रों ने कहा, "घरेलू कंज्यूमर हमेशा प्रायोरिटी रहेंगे," क्योंकि भारत और LPG पार्टनर ढूंढ रहा है।


पेट्रोल-डीजल के भी नहीं बढ़ेंगे दाम

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल भारत में घबराने की कोई जरूरत नहीं है। देश में पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ की भी फिलहाल कोई कमी नहीं है। सरकार के सूत्रों के मुकाबिक, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास बढ़ती लागत को संभालने की पर्याप्त क्षमता है। इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 9 मार्च को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। दिन में एक समय इसकी कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी, हालांकि बाद में यह घटकर करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। जब कच्चे तेल की कीमतें पहले भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गई थीं, तब भी सरकारी तेल कंपनियों ने तुरंत पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ाई थीं।

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