अब बाजार में राशन या तेल खरीदते समय आपको अलग-अलग कंपनियों के अजीबोगरीब साइज के पैकेट देखकर भ्रमित नहीं होना पड़ेगा। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खाने के तेल (Edible Oils) और ब्लेंडेड तेल की पैकेजिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने तेल के पैकेटों और बोतलों के लिए कुछ खास स्टैंडर्ड साइज (तय आकार) तय कर दिए हैं।
यह फैसला देश के करीब 90 प्रतिशत खाद्य तेल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़े एसोसिएशनों के साथ लंबी बातचीत के बाद लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में बढ़ते अजीबो-गरीब पैकेट साइज को रोकना है, जिससे ग्राहकों को दो अलग-अलग ब्रांड के तेल की असली कीमत और वजन की तुलना करने में आसानी हो।
अब कंपनियां केवल नीचे दिए गए वजन या वॉल्यूम (लीटर/मिलीलीटर) में ही खाने का तेल बेच सकेंगी। यह नियम पाम ऑयल, सोयाबीन, सूरजमुखी (सनफ्लावर), सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड और मक्के (कॉर्न) के तेल पर लागू होगा:
गरीब और मध्यम वर्ग की सहूलियत के लिए सरकार ने 200 ml या 200 ग्राम से छोटे पैकेटों (जैसे छोटे पाउच) को इस नियम से बाहर रखा है, ताकि सस्ते और छोटे पैकेट बाजार में मिलते रहें। साथ ही, बहुत कम बिकने वाले अन्य मामूली तेलों को भी इसमें छूट दी गई है।
अब लीटर के साथ 'वजन' लिखना भी जरूरी
अक्सर देखा गया है कि तापमान बदलने से तेल के लीटर और किलोग्राम के अनुपात में अंतर आ जाता है, जिससे ग्राहक समझ नहीं पाते कि उन्हें पूरा तेल मिला या नहीं।
नए नियम के मुताबिक, अगर कंपनी पैकेट पर तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर (वॉल्यूम) में दिखा रही है, तो उसे पैकेट पर साफ-साफ उसके बराबर का वजन (ग्राम या किलोग्राम में) भी लिखना होगा।
यह नियम भारत में बनने वाले तेल के साथ-साथ विदेशों से आयात (Import) होने वाले तेल पर भी बराबर लागू होगा।
कंपनियों को मिला 3 महीने का समय
सरकार ने तेल बनाने वाली, पैक करने वाली और विदेशों से मंगाने वाली कंपनियों को इन नए नियमों को अपनाने के लिए 3 महीने का समय (Transition Period) दिया है। हालांकि, जो कंपनियां इसे आज से ही लागू करना चाहती हैं, वे तुरंत कर सकती हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि वे बाजार में पारदर्शिता, निष्पक्षता और ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने वाले ऐसे सुधारों के जरिए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध हैं।