अब हथौड़े से नहीं, एल्गोरिदम से होगी खुदाई! भारत बना रहा ₹100 करोड़ का AI सेंटर, पाताल से खोज निकालेगा छिपा हुआ खजाना

Geological Survey of India AI Centre: दशकों से भारत खनिजों की खोज के लिए पारंपरिक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, फील्ड स्टडी और ड्रिलिंग पर निर्भर रहा है। इससे सतह पर दिखने वाले खनिज बेल्ट तो मिल गए, लेकिन अब जमीन की गहराइयों में छिपे खनिजों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है। अब ध्यान उन गहरे और छिपे हुए डिपॉजिट्स पर है, जो जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देते। यह नया सेंटर इसी मुश्किल को आसान करेगा

अपडेटेड Jun 07, 2026 पर 1:14 PM
बेंगलुरु में बनेगा 100 करोड़ का AI सेंटर, पाताल से खोजेगा छिपा हुआ खजाना

India AI Mineral Exploration: भारत अब दुनिया के 'खनिज एक्सप्लोरेशन' में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री होने जा रही है। देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) बेंगलुरु में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक केंद्र स्थापित करने जा रहा है।

इस केंद्र का नाम डेटा प्रोसेसिंग, इंटरप्रिटेशन एंड इंटीग्रेशन सेंटर (DPIIC) होगा। यह केंद्र भारत के उन महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज का मुख्य तंत्र बनेगा, जिनकी जरूरत आज क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर को सबसे ज्यादा है।

8.5 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके की होगी 'डिजिटल स्कैनिंग'


यह नया एआई सेंटर अगले पांच वर्षों में देश के लगभग 8.5 लाख वर्ग किलोमीटर के खनिज-संभावित क्षेत्रों के डेटा का विश्लेषण करेगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत के खनिज खोज अभियान के लिए एक 'गेम-चेंजर' साबित हो सकता है।

दशकों से भारत खनिजों की खोज के लिए पारंपरिक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, फील्ड स्टडी और ड्रिलिंग पर निर्भर रहा है। इससे सतह पर दिखने वाले खनिज बेल्ट तो मिल गए, लेकिन अब जमीन की गहराइयों में छिपे खनिजों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है। अब ध्यान उन गहरे और छिपे हुए डिपॉजिट्स पर है, जो जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देते। यह नया सेंटर इसी मुश्किल को आसान करेगा।

हथौड़े और मैप की जगह अब एल्गोरिदम से होगी खोज

बेंगलुरु का यह सेंटर दशकों से जमा किए गए विशाल भूवैज्ञानिक, भू-भौतिकीय, भू-रासायनिक और सैटेलाइट डेटा को एक साथ लाएगा। इसके बाद एडवांस्ड एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) टूल्स का इस्तेमाल करके उन इलाकों की पहचान की जाएगी, जहां जमीन के नीचे कीमती खनिज होने की संभावना सबसे ज्यादा है।

इससे वैज्ञानिकों को फील्ड में महंगी खुदाई या ड्रिलिंग शुरू करने से पहले ही सटीक 'प्रेडिक्टिव मॉडल' मिल जाएंगे, जिससे समय और पैसा दोनों बचेंगे।

क्यों पड़ी इस AI सेंटर की जरूरत?

इस प्रोजेक्ट की टाइमिंग भारत के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत इस समय इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन सबके लिए क्रिटिकल मिनरल्स जैसे- लिथियम, कोबाल्ट आदि बेहद जरूरी हैं।

फिलहाल इन खनिजों की वैश्विक आपूर्ति कुछ ही देशों के हाथों में सिमटी हुई है। ऐसे में आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घरेलू स्तर पर इन संसाधनों को खोजना भारत के लिए बहुत जरूरी हो गया है।

हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और 3D विजुअलाइजेशन से लैस होगा सेंटर

100 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत बेंगलुरु सेंटर में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड-बेस्ड डेटा मैनेजमेंट और एडवांस्ड 3D विजुअलाइजेशन टूल्स लगाए जाएंगे। ये टूल्स जमीन के नीचे का एक सटीक 3D मॉडल तैयार करेंगे।

यह सुविधा न सिर्फ खनिज खोजने में मदद करेगी, बल्कि नीति निर्माताओं और रिसर्च संस्थानों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल लाइब्रेरी का काम करेगी, जिससे रिस्क कम होगा और खनन के लिए नए ब्लॉक तेजी से उपलब्ध हो सकेंगे।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।