गुजरात के वडोदरा जिले के मलसर गांव में एक एक साल के छोटे बच्चे को डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक तेज बुखार और लगातार खांसी की शिकायत थी। परिवार वाले उसे कई प्राइवेट अस्पतालों में ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने इसे सामान्य निमोनिया समझकर इलाज किया। बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार परिवार बच्चे को गोत्री के GMERS सरकारी अस्पताल ले गया। वहां ENT विभाग के डॉक्टरों ने बच्चे की गहराई से जांच की। एक्स-रे करने पर पता चला कि बच्चे की सांस की नली (windpipe) में कोई अजनबी चीज फंसी हुई है।
डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कोपी नाम की एक छोटी सर्जरी की। इसमें उन्होंने बच्चे की सांस की नली से एक छोटा LED बल्ब निकाला। यह बल्ब सिर्फ 1 सेंटीमीटर का था और बच्चे के मुंह से जाता हुआ गले में फंस गया था।
ENT विभाग के प्रमुख डॉ. हिरेन सोनी ने बताया, “जांच में पता चला कि सांस की नली में कोई समस्या है। एक्स-रे से शक हुआ कि कोई विदेशी चीज अंदर है। ऑपरेशन के दौरान ब्रोंकोस्कोप डालकर देखा तो एक धातु जैसी चीज दिखी। क्योंकि यह डेढ़ महीने से फंसा था, इसलिए इसके ऊपर स्किन चढ़ गई थी। हमारे आधुनिक उपकरणों की मदद से हमने यह 1 सेंटीमीटर का LED बल्ब सुरक्षित निकाल दिया। बल्ब निकालने के बाद बच्चा अब पूरी तरह ठीक है। आज ही उसे छुट्टी मिल जाएगी।”
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा अब बिल्कुल स्वस्थ है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है। परिवार ने राहत की सांस ली है।
यह घटना बताती है कि छोटे बच्चों के साथ खिलौने या छोटी चीजों को बहुत सावधानी से रखना चाहिए, क्योंकि वे मुंह में डालकर गले में फंसा सकते हैं। ऐसे मामलों में जल्दी सही जांच और इलाज बहुत जरूरी होता है।